29 अप्रैल को विधिविधान के साथ केदारनाथ धाम के कपाट आम दर्शनों के लिए खोल दिए गए हैं। आइए जानते हैं धाम से जुड़ा एक बड़ा रहस्य...
हर साल भैया दूज पर भगवान आशुतोष के 11वे ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद किए जाते हैं। जिसके पीछे एक कहानी छुपी हुई है। इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
भैया दूज पर शीतकाल के लिए कपाट बंद होने के बाद बाबा की चल विग्रह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचती है। जहां बाबा केदार की शीतकाल के छह माह पूजा की जाती है।
केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग ने बताया कि कुरुक्षेत्र युद्ध के उपरांत अपने पित्रों का कर्मकांड करने के बाद पांडवों को भैयादूज के दिन ही स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी। इसलिए भैया दूज से शीतकाल प्रारंभ माना जाता है और पंरपराओं के अनुरुप बाबा केदार के कपाट बंद किए जाते हैं।
श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा भगवान केदारनाथ के मंदिर को 20 कुंतल गेंदा के फूलों से सजाया गया है। चारों ओर बिजली की रंग-बिरंगी झालरें मंदिर की भव्यता को चार चांद लगा रही हैं। बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने बताया कि मंदिर को सजाने के लिए ऋषिकेश से 26 अप्रैल को फूल केदारनाथ पहुंचा दिए गए थे। फूलों के साथ बेलपत्री, आम और पीपल के पत्तों की माला का भी उपयोग किया गया है।