आज सुहागिनों के लिए बेहद खास दिन है। करवाचौथ पर महिलाओं के लिए व्रत के अलावा चंद्र दर्शन का खास महत्व होता है। चंद्र दर्शन के बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है। शास्त्रों में कहा गया है कि दिनभर व्रत रखकर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए। इससे पति की आयु लंबी होती है। चांद को अर्घ्य देते समय पूजा में कुछ चीजों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित संतराम के अनुसार, करवाचौथ पर कथा श्रवण का मुहूर्त सायं 5.20 बजे से 7.05 बजे तक है। अलग-अलग भागों में चंद्रोदय अलग-अलग समय पर होता है। उत्तराखंड के अधिकांश भागों में चंद्रोदय रात्रि 8.38 बजे होगा। पहाड़ में शाम 7 बजकर 47 मिनट पर चंद्रोदय होगा, लेकिन भद्रा 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। करवा पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 7.55 बजे से शुरूहोगा।
सुहागिनों को यह बात जरूर ध्यान रखनी चाहिए कि पूजन के समय उनकी थाली में छलनी, आटे का दीपक, फल, ड्राईफ्रूट, मिठाई और दो पानी के लोटे होने चाहिए। एक चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए और दूसरा व्रत खोलने के लिए। पूजा में माचिस न रखें।
पूजा के बाद ध्यान रहे कि चांद को देखकर पहले आप अपने पति को पानी पिलाएं। इसके बाद आप पिएं। पति को पहले पानी इसलिए पिलाया जाता है क्योंकि हम उन्हें परमेश्वर मानकर पहले उन्हें भोग लगाते हैं और फिर खुद खाते हैं। अर्घ्य वाले लोटे का पानी न पीएं। पूजा के बाद पहले फ्रूट, ड्राईफ्रूट और मीठा खाएं, पति को भी खिलाएं।
अर्घ्य देते समय वो चुन्नी साथ ज़रूर ले जाएं, जिसे आपने कथा सुनते समय पहना था। चंद्रमा को छलनी में दीया रखकर उसमें से देखें, फिर उसी छलनी से तुरंत अपने पति को देखें। कई लोग जलते हुए दीये को पीछे फेंक देते हैं, ऐसा नहीं करना चाहिए। कई लोग दीये के बुझने को भी अपशकुन मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। इस तरह का वहम न पालें।