जोशीमठ में भू-धंसाव के बाद उपजी स्थितियों के बाद मंगलवार को दो सुखद खबरें भी सामने आई हैं। पहली जेपी कॉलोनी में फूटे पानी के फव्वारे की रफ्तार धीमी पड़ी है तो दूसरी नए घरों में दरारें की बात सामने नहीं आई है। 2 जनवरी को जोशीमठ के सबसे नीचले हिस्से में मुख्य नगर से करीब नौ किमी दूर मारवाड़ी स्थित जेपी कॉलोनी में मटमैले पानी की एक जलधारा फूट पड़ी थी। जो तब से लगातार बह रही है।
Joshimath Is Sinking: जोशीमठ में भू-धंसाव के बीच दो अच्छी खबर, पानी का रिसाव हुआ कम, नए घरों में नहीं दरारें
जिस दबाव से पानी बह रहा है, वह बताता है कि जमा पानी का स्थान नदी तल से काफी अधिक ऊंचाई पर होना चाहिए। यह स्थान जोशीमठ या उससे भी ऊपर हो सकता है। पानी का मैलापन उस मलबे के द्रव्यमान के क्षरण का संकेत है, जिस पर जोशीमठ स्थित है। हालांकि बारिश होने पर बहते स्रोत का क्या रूख रहेगा, यह देखने वाली बात होगी। - डॉ. पीयूष रौतेला, भू-विज्ञानी एवं अधिशासी अधिकारी, यूएसडीएमए
723 पहुंची दरार वाले भवनों की संख्या, 86 असुरक्षित
जोशीमठ में असुरक्षित भवनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मंगलवार को 45 भवन और चिन्हित किए गए। इस तरह से अब तक कुल 723 भवन चिन्हित किए जा चुके हैं। इनमें से 86 भवनों को पूरी तरह से असुरक्षित घोषित कर लाल निशान लगा दिए गए हैं। जल्द ही इन भवनों को ढहाने की कार्रवाई शुरू होगी।
462 परिवारों को विस्थापित किया गया
जिला प्रशासन की ओर से अब तक 462 परिवारों को अस्थायी रूप से विस्थापित किया जा चुका है। मंगलवार को 381 लोगों को उनके घरों से सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट किया गया। जबकि इससे पहले 81 परिवारों को शिफ्ट किया गया था। प्रशासन की ओर से अब तक विभिन्न संस्थाओं-भवनों में कुल 344 कमरों का अधिग्रहण किया गया है। इनमें 1425 लोगों को ठहराने की व्यवस्था की गई है।
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20 मकानों के बिजली कनेक्शन काटे
भू-धंसाव से असुरक्षित क्षेत्र में प्रशासन की ओर से ऊर्जा निगम को बिजली लाइनें हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत मंगलवार को 20 असुरक्षित भवनों के कनेक्शन काट दिए गए।