वैष्णव संप्रदाय के सर्वोच्च पद पर आसीन जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज अयोध्या में भव्य राममंदिर बनते देखना चाहते थे। लेकिन उनके जीवन जोत बुझने के साथ ही उनका यह सपना अधूरा रह गया।
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स्वामी हंसदेवाचार्य
- फोटो : amar ujala
हंसदेवाचार्य महाराज ने कहा था कि तरीका कोई भी हो, अब राम मंदिर बनना चाहिए। इसके लिए चाहे केंद्र सरकार संसद में कानून बनाए या फिर न्यायपालिका से रास्ता निकले। राम मंदिर की मुहिम में जगद्गुरु स्वामी हंसदेवाचार्य प्रमुखता से लगे हुए थे। उन्होंने दिल्ली, अयोध्या, बनारस में हुए संत सम्मेलन के साथ ही धर्मसंसद में राम मंदिर मुद्दे को लेकर बड़ी भूमिका निभाई थी।
प्रयागराज कुंभ में स्नान करने पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ अन्य दिग्गज नेताओं से उन्होंने राम मंदिर बनाने के लिए पहल करने को कहा था। उनका कहना था कि राम मंदिर बनाने के लिए मुस्लिम समाज भी देशवासियों के साथ है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ भी उनके अच्छे संबंध थे। वे बेबाकी से देश हित में मुद्दे उठाते रहते थे।
प्रयागराज कुंभ में जाने से पूर्व उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि राम मंदिर शीघ्र बनेगा। उनका विश्वास था कि वार्ता के साथ कोई न कोई निर्णय अवश्य निकलेगा। दिल्ली में हुए धर्म संसद में उन्हें शीर्ष संतों का समर्थन मिला था और उन्होंने धर्मादेश जारी कर केंद्र सरकार को आदेशित किया था कि यदि मंदिर निर्माण के संबंध में न्यायालय की ओर से विलंब किया जा रहा है तो केंद्र सरकार कानून बनाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे। स्वामी हंसदेवाचार्य ने अपनी विशिष्ट शैली एवं कुशल वक्ता होने के चलते विहिप के मार्गदर्शक मंडल एवं संत समाज में अलग पहचान बनाई।
बीते दिनों राम मंदिर निर्माण के लिए जब सत्यमित्रानंद गिरि ने छह दिसंबर को हरकी पैड़ी पर आमरण अनशन की बात कही तो स्वामी हंसदेवाचार्य खास तौर पर उनसे मिले और राम मंदिर निर्माण के लिए कटिबद्ध होने की बात कही थी, लेकिन शुक्रवार सुबह संत समाज के साथ ही हिंदू समाज के बड़े रक्षक की जीवन जोत देश को रोशन कर हमेशा के लिए बुझ गई। उनके संदेश, विचार और राम मंदिर के लिए चलाई गई उनकी मुहिम हमेशा याद की जाएगी।