मानव सेवा क्या होती है यह जानना है तो इटली की सिस्टर जुआना से सीखें। जिन लोगों को समाज हीन भावना से देखता है। सिस्टर जुआना ऐसे लोगों की सेवा में 24 वर्षों से जुटी हैं। यही वजह है कि सात समंदर पार से सिस्टर जुआन को 17 बार कुष्ठ रोगियों का प्यार तीर्थनगरी खींच लाया।
कुष्ठ रोगियों की सेवा को सात समुंदर पार से भारत आईं जुआना
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यही नहीं वह 24 साल से ब्रह्मपुरी और रायपुर स्थित कुष्ठ कालोनी में रहने वाले लोगों के हाथों से तैयार होने वाले कपड़ों का ही इस्तेमाल करती हैं और अपने साथियों को भी प्रेरित करती हैं। 82 वर्षीय सिस्टर जुआना बताती है कि 1992 में उन्होंने इटली में शिवानंद के शिष्य स्वामी चिदानंद के आध्यात्मिक प्रवचन सुने थे।
प्रवचन में स्वामी चिदानंद ने कुष्ठ मरीजों का जिक्र किया। इससे उनका ह्रदय ऐसे मरीजों की सेवा करने के लिए जागृत हुआ। 1992 में जब वह पहली बार भारत आईं तो उन्होंने ब्रह्मपुरी और रायपुर स्थित नालापानी कुष्ठ कालोनी में कुष्ठ रोगियों से मुलाकात कर उनका दुख दर्द जाना।
साथ ही उन्होंने यहां पर कुष्ठ रोगियों के हाथों से बनाए जा रहे चादर, शॉल, कुर्ता आदि तैयार किए गए कपड़ों को अपनाया। यही नहीं वह विदेश में भी अपने साथियों से मरीजों के हाथों से बने कपड़ों को पहनने की बात करती हैं। जब भी वह तीर्थनगरी आती हैं, वह यहां से अपने और अपने रिश्तेदारों के लिए यही कपड़े साथ ले जाती हैं।
जुआना ने अपना जीवन समाजसेवा में व्यतीत किया है। वह इटली में समाज सेवा कर लोगों के लिए प्रेरणा की मिसाल बनी हुई हैं। यही कारण है कि इटली के लोग उन्हें सिस्टर जुआना के नाम से पुकारते हैं।