रविवार को देशभर में करवाचौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखेंगी। तो चलिए जानते हैं कि सबसे पहले किसने इस व्रत को रखा था, और कैसे इस व्रत की शुरुआत हुई थी।
कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सौभाग्यवती महिलाएं करवाचौथ का व्रत रखती हैं। इस व्रत को सौभाग्य प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है। इसलिए सुहागिने अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत रखती हैं।
मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले माता पार्वती ने यह व्रत शिवजी के लिए रखा था। इसके बाद ही उन्हें अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था। इसलिए इस व्रत में भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा की जाती है। वहीं महाभारत में पांडवों की विजय के लिए द्रौपदी द्वारा भी इस व्रत को रखा गया था।
इस दिन महिलाएं इसलिए ही निर्जला व्रत रखती हैं। यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। वहीं यह भी कहा गया है कि एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ और देवताओं की हार होने लगी। इसके बाद भगवान ब्रह्मा कहा कि सभी देवताओं की पत्नियों को अपने पतियों के लिए व्रत रखना चाहिए और उनकी विजय के लिए प्रार्थना करें।
ज्यातिषाचार्य पंडित सुशांतराज के अनुसार, कार्तिक माह में चतुर्थी के दिन सभी देवताओं की पत्नियों ने व्रत रखा। उनकी प्रार्थना स्वीकार हुई और युद्ध में देवताओं की विजय हुई। इस व्रत को रखने वाली महिला काले और सफेद कपड़े नहीं पहनें। लाल और पीले वस्त्र धारण करें। इस दिन विवाहित महिलाओं को मेहंदी लगाकर पूर्ण शृंगार करना चाहिए।