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इस साल दो माह का होगा ये महीना, जानिए क्या है इसका कारण ? 

Tue, 03 Apr 2018 04:39 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Updated Tue, 03 Apr 2018 04:39 PM IST
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hindu nav varsh 2018 longest month
astrology - फोटो : amarujala

जिस प्रकार नववर्ष शुक्ल पक्ष से प्रारंभ होता है, उसी प्रकार पुरुषोत्तम मास भी शुक्ल पक्ष से प्रारंभ होता है। इस बार पुरुषोत्तम मास 16 मई से शुरू होगा और 13 जून को समाप्त होगा। जहां तक दो महीने चलने वाले ज्येष्ठ मास का सवाल है, यह मास एक मई को शुरु होकर 28 जून तक चलने वाला है। प्रत्येक संवत में बारह महीने पड़ते है। चौथे वर्ष जब पुरुषोत्तम मास आता है, तब एक महीना बढ़कर वर्ष के तेरह महीने हो जाता है। यह वर्ष भी अधिक मास का वर्ष है। प्रत्येक नवसंवत्सर शुक्ल पक्ष से शुरू होता है, उसी प्रकार अधिक मास में भी शुक्ल पक्ष पहले और कृष्ण पक्ष बाद में आते हैं। पुरुषोत्तम मास की विशेषता यह है कि यह मास संक्रांति विहीन है।


 

hindu nav varsh 2018 longest month
surya puja - फोटो : google
गौरतलब है कि भगवान सूर्य नारायण प्रतिमास एक राशि में प्रवेश करते हैं। पुरुषोत्तम मास में कोई संक्रांति नहीं पड़ती। नतीजतन ज्येष्ठ मास लगने पर जो संक्रांति रहती है, पुरुषोत्तम मास में भी बनी रखेगी। वर्षों का यह प्राचीन गणित इस लिए भी सत्य है, चूंकि जिस वर्ष पुरुषोत्तम मास पडे़, उसी वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर का लीप ईयर होता है। लीप ईयर में फरवरी 29 दिनों की होती है।

 
hindu nav varsh 2018 longest month
astrology - फोटो : self
अंतर इतना है कि अंग्रेजी कैलेंडर में वर्ष का एक दिन बढ़ता है, जबकि देशी भारतीय कैलेंडर में पूरा एक महीना बढ़ जाता है। इस बढ़े महीने के कारण अधिक मास से पूर्व आने वाले पर्व जल्दी पड़ते है और अधिक मास के बाद के पर्व एक महीना विलंब से आते हैं। ज्येष्ठ का महीना बीतते ही पर्व एक महीना देर से आना शुरू हो जाएंगे। फिर अधिक मास का यह कैलेंडर उसी मुकाम पर पहुंच जाएगा। 

 
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vishnu ji
पुरुषोत्तम मास में देश के सभी तीर्थ क्षेत्रों में भगवान विष्णु के निमित्त कार्यक्रम होते हैं। इनमें श्रीमद् भागवत कथाएं सबसे प्रमुख हैं। यही कारण है कि तीर्थ नगरी में वैशाख की कथाएं बहुत कम हो रही है। दर्जनों स्थानों पर पुरुषोत्तम मास में कथाओं का आयोजन किया जाएगा। धर्मनगरी में लाखों श्रद्धालुओं के महीन भर बने रहने के देखते हुए धर्म क्षेत्र में व्यापक तैयारियां शुरू हो गई हैं। चूंकि इस महीने को भगवान विष्णु ने स्वयं अपना पुरुषोत्तम नाम दिया, अत: इस महीने विष्णु मंदिरों में भी खासी भीड़ रहेगी।
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