हेमकुंड साहिब के कपाट रविवार दोपहर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने से पहले मुख्य ग्रंथी भाई मिलाप सिंह और कुलवंत सिंह ने इस वर्ष की अंतिम अरदास पढ़ी। हेमकुंड की अंतिम अरदास में करीब 1800 श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया। इस वर्ष 11000 श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब के दर्शन किए।
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रविवार सुबह 10 बजे सुखमणी साहिब का पाठ प्रारंभ हुआ। इसके बाद सुबह 11 बजे शबद कीर्तन और दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर इस वर्ष की अंतिम अरदास के बाद पंच प्यारों की अगुवाई में गुरुग्रंथ साहिब को दरबार साहिब से लाकर सचखंड में विराजमान कर दिया गया।
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दोपहर ठीक डेढ़ बजे 418 इंजीनियरिंग कोर सेना की मधुर बैंड धुन के बीच हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने बताया कि कपाट बंद होने के दौरान लगभग 1800 तीर्थयात्री अंतिम अरदास में शामिल हुए।
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हेमकुंड साहिब
- फोटो : अमर उजाला
गोविंदघाट गुरुद्वारे के वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने कहा कि इस बार कोरोना संक्रमण के कारण 18 सितंबर को हेमकुंड साहिब के कपाट खोले गए थे। इस अल्प समय में भी हजारों श्रद्धालु तीर्थ आए। इससे आगामी वर्ष यात्रा के बेहतर चलने की उम्मीद है।
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हेमकुंड साहिब
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इस अवसर पर हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के मुख्य प्रबंधक सरदार जनक सिंह और रविंदर सिंह के साथ ही सैकड़ों तीर्थयात्री मौजूद थे। हेमकुंड साहिब सिखों का पवित्र धार्मिक स्थल है। यह उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में है। हिमालय की गोद में बसा हेमकुंड साहिब सिख धर्म की आस्था का प्रतीक है।
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हेमकुंड साहिब
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हर साल हजारों की तादाद में देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। चारों तरफ से पत्थरीले पहाड़ और बर्फ से ढकी चोटियों के बीच बसा हेमकुंड साहिब समुद्र तल से 4329 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां का सफर बहुत ही मुश्किल है।
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हेमकुंड साहिब
- फोटो : अमर उजाला
हेमकुंड साहिब जाने के लिए श्रद्धालुओं को बर्फीले रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। हालांकि इस बार बर्फ कम रही। हेमकुंड साहिब के कपाट हमेशा 25 मई को खोल दिए जाते थे। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते कपाट करीब साढ़े तीन महीने देरी से खोले गए थे।