चारधाम यात्रा 2021: तीर्थयात्रियों के लिए ई-पास की व्यवस्था खत्म, साथ लाएं ये दस्तावेज, इन बातों का रखें ध्यान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 05 Oct 2021 10:15 PM IST

सार

Chardham Yatra 2021 New Sop: बाहरी राज्यों से आने वाले तीर्थयात्रियों को देहरादून स्मार्ट सिटी पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। जबकि उत्तराखंड के निवासियों को यात्रा पर जाने के लिए स्मार्ट सिटी पोर्टल पर पंजीकरण की जरूरत नहीं है।
केदारनाथ धाम
केदारनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार

उत्तराखंड हाईकोर्ट से मंगलवार को चारधाम यात्रा में असीमित तीर्थयात्रियों के प्रवेश का आदेश जारी होने के बाद शासन ने चारधाम यात्रा की संशोधित मानक प्रचालन विधि(एसओपी) जारी कर दी। इसके तहत अब चारधाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों को ई-पास की जरूरत नहीं होगी। बाहरी राज्यों से आने वाले तीर्थयात्रियों को केवल देहरादून स्मार्ट सिटी पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।
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सचिव हरिश्चंद्र सेमवाल की ओर से जारी एसओपी के मुतबिक, बाहरी राज्यों से आने वाले तीर्थयात्रियों को देहरादून स्मार्ट सिटी पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। जबकि उत्तराखंड के निवासियों को यात्रा पर जाने के लिए स्मार्ट सिटी पोर्टल पर पंजीकरण की जरूरत नहीं है।


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सभी तीर्थयात्रियों को कोविड वैक्सीन की दोनों डोज लगने के 15 दिन बाद का प्रमाण पत्र दिखाने पर चारधाम यात्रा की अनुमति मिलेगी। अगर किसी यात्री ने एक डोज लगवाई है या कोई डोज नहीं लगवाई है तो उन्हें 72 घंटे के भीतर की आरटीपीसीआर कोविड निगेटिव रिपोर्ट दिखाने पर ही दर्शन की अनुमति मिलेगी। 

आपको बता दें कि अभी तक हाईकोर्ट के आदेश के तहत केदारनाथ धाम में प्रतिदिन 800, बदरीनाथ में 1000, गंगोत्री में 600 और यमुनोत्री में 400 तीर्थयात्रियों को प्रवेश की अनुमति थी लेकिन मंगलवार को हाईकोर्ट ने यह बंदिश हटा दी।

चारों धाम में कोविड वहन क्षमता के तहत होंगे दर्शन
एसओपी में यह भी साफ किया गया है कि भले ही यात्रियों की बंदिश हाईकोर्ट ने हटा दी हो लेकिन धामों की कोविड वहन क्षमता के तहत ही दर्शन की अनुमति दी जाएगी। इसमें सामाजिक दूरी छह फीट के मानदंडों का पालन अनिवार्य होगा। 

संक्रमित पाए जाने पर होगा परीक्षण
एसओपी में यह भी कहा गया है कि अगर चारधाम यात्रा जांच के दौरान कोई तीर्थयात्री संक्रमित मिलता है तो उसे संबंधित परीक्षण केंद्र या अस्पताल में कोविड-19 जांच के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद लक्षणों की गंभीरता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रोटोकॉल के तहत उस मरीज को आगे रेफर किया जाएगा।

कोविड नियमों का पालन कर आएं उत्तराखंड: धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की कि वे कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए उत्तराखंड आएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आने वाले श्रद्धालु कोविड गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए चार धाम के लिए जारी एसओपी का पूरा पालन करें। यात्रा पर निकलने से पहले अपने सभी जरूरी दस्तावेज और कोविड-19 निगेटिव रिपोर्ट और वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट को साथ लाएं। कहा कि सरकार का प्रयास है कि यात्रा भी चलती रहे और यात्रियों की सुरक्षा भी बनी रहे। 

चारों धाम में प्रवेश के लिए निशुल्क टोकन जरूरी, प्रसाद या टीका प्रतिबंधित

चारधाम यात्रा की नई एसओपी जारी होने के बाद देवस्थानम बोर्ड ने भी चारों धाम के लिए एक एसओपी जारी की है। बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने कहा कि इस एसओपी का सभी धामों में उप जिलाधिकारी के माध्यम से अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। 

यह है एसओपी के मुख्य बिंदु
- बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के गर्भ गृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा।
- केदारनाथ धाम के गर्भ गृह में श्रद्धालुओं को मात्र दर्शन या प्रदक्षिणा की अनुमति होगी। शिवलिंग में जलाभिषेक एवं घी लेपन आदि पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा।
- सभामंडप में किसी को भी बैठने की अनुमति नहीं होगी। अगर कोई यात्री या श्रद्धालु विशेष पूजा कराना चाहते हैं तो आचार्यगणों, वेदपाठी, पुजारी उनकी पूजा कराएंगे। लेकिन ऐसे श्रद्धालु भी मात्र दर्शन (धर्म दर्शन) निर्धारित समय तक ही कर सकेंगे। 
- तीर्थयात्रियों को बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए निशुल्क टोकन लेना होगा, जो देवस्थानम बोर्ड की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा। वीआईपी या तत्काल दर्शन के लिए अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।
- निशुल्क दर्शन टोकन लेने के लिए सभी काउंटरों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। दर्शन से पहले यह टोकन लेना अनिवार्य है।
- श्रद्धालुओं को दर्शन टोकन में अंकित समय पर दर्शन लाइन में दर्शन के लिए मंदिर परिसर में निर्धारित लाइन में खड़ा होना होगा।
- प्रवेश द्वार पर हाथों को कीटाणु रहित करने हेतु एल्कोहल युक्त सैनिटाइजर का प्रयोग होगा। थर्मल स्क्रीनिंग से जांच भी की जाएगी।
- जांच के दौरान कोविड के लक्षण होने पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- कोविड प्रोटोकॉल बिहैवियर का पालन करना होगा।
- सभी श्रद्धालुओं को धर्म दर्शन के लिए अत्यंत सीमित समय दिया जाएगा।
- मूर्तियों, घंटियों, प्रतिरूपों, ग्रन्थों, पुस्तकों को स्पर्श करने की अनुमति नहीं होगी।
- देवस्थानम परिसर में किसी भी प्रकार का प्रसाद वितरण टीका लगाने आदि की अनुमति नहीं होगी।
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