फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Haridwar Kumbh Mela 2021 : रजवाड़ों से जुड़े हैं कुंभ जमातों के शाही स्नान, पढ़ें इस महा पर्व का उर्दू से जुड़ा इतिहास

Mon, 18 Jan 2021 11:29 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 18 Jan 2021 11:29 AM IST
विज्ञापन
Haridwar Kumbh Mela 2021 news : know awesome and huge history of kumbh mela
संतों के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है कुंभ - फोटो : अमर उजाला (file photo)

कुंभ मेलों में शाही जुलूस, शाही स्नान, पेशवाई, जमातें, लाव-लश्कर और जखीरों का जिक्र आते ही आम लोगों के जहन में तमाम सवाल उठते हैं। जानने की उत्सुकता भी होती है आखिर इनका इतिहास क्या है और उर्दू लफ्जों से जुड़ाव क्यों है। दरअसल, ये सब संतों के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हैं।

Haridwar Kumbh Mela 2021 news : know awesome and huge history of kumbh mela
अखाड़ा परिषद - फोटो : अमर उजाला (file photo)

सभी के साथ उर्दू लफ्ज भी जुड़े हैं। संतों के अखाड़ों में इन शब्दों का न केवल प्रयोग होता है, बल्कि लिखापढ़ी में भी यही शब्द चलते हैं। अखाड़ों से राजा महाराजाओं के प्रवेश से भी शाही शब्द का जुड़ाव है। मुगलकाल में बादशाही कामकाज की भाषा फारसी और उर्दू बन चुकी थी। तब समाज में भी उसका प्रचलन सामान्य हो गया था।

Haridwar Kumbh Mela 2021 news : know awesome and huge history of kumbh mela
पेशवाई - फोटो : अमर उजाला (file photo)

कुंभ पर निकलने वाली संतों की प्रवेश वाई उसी काल में पेशवाई हो गई। एक कुंभ नगर से दूसरे कुंभ नगर लाए जाने वाले भारी भरकम कोष को जखीरे कहे जाने लगे। साधुओं की शोभायात्राएं शाही जुलूसों और शाही स्नानों में बदल गई। कालांतर में जब कुंभ मेलों में लूटपाट और कत्लेआम शुरू हुआ तब हिंदू राजाओं और रजवाड़ों ने साधुओं की धर्म यात्राओं, स्नानों और पेशवाई में अपनी सेनाओं को भेजना शुरू किया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Haridwar Kumbh Mela 2021 news : know awesome and huge history of kumbh mela
पेशवाई - फोटो : अमर उजाला (file photo)

तब बैरागी, संन्यासी, उदासी, निर्मल, घीसापंथी, गरीबदासी, कबीरदासी, रामानंदी आदि साधुओं की जमातों में रजवाड़ों की सेनाएं अपने रथों, हाथियों, घोड़ों और हथियारों के साथ चला करती थी। ऐसे में साधुओं के अखाड़ों के साथ राजाओं और जागीरदारों को भी कुंभ स्नान का प्रतिफल प्राप्त हो जाता। इसी प्रकार देशभर में भ्रमणशील जमातें कुंभ से पूर्व रमतापंचों के साथ कुंभनगर पहुंचती।

विज्ञापन
Haridwar Kumbh Mela 2021 news : know awesome and huge history of kumbh mela
हरिद्वार गंगा स्नान - फोटो : अमर उजाला (file photo)

पहले उनकी रक्षा अखाड़ों की अपनी सशस्त्र टुकड़ियां करती थी। बाद में जब बादशाहों की सेनाओं ने भी लूटपाट शुरू की तब हिंदू राजाओं ने अखाड़ों की रक्षा का दायित्व उठाया। जमाने बीत गए, लेकिन पेशवाईयां, शाही स्नान आदि कुंभ आयोजनों का प्रमुख अंग आज भी बने हुए हैं। तमाम तैयारियां जमातों के शाही स्नानों के लिए की जा रही हैं।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed