फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Haldwani: उत्तराखंड की संस्कृति पर कभी नहीं पड़े खून के छींटे, देवभूमि के ललाट पर दाग लगा गई हल्द्वानी हिंसा

Fri, 09 Feb 2024 02:19 PM IST
Renu Saklani रेनू सकलानी
Updated Fri, 09 Feb 2024 02:19 PM IST
विज्ञापन
Haldwani Violence: Uttarakhand has never been a history of violent incidents
हल्द्वानी में हिंसा - फोटो : अमर उजाला

देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति में खून का ये रंग पहले कभी नहीं घुला था। हमेशा से यह राज्य शांत रहा है। इसकी शांत वादियों ने सदैव बाहरी लोगों को यहां की ओर आकर्षित किया है। यही वजह है कि आज इस घटना ने पूरे उत्तराखंड के मन मस्तिष्क को झकझोर दिया है। 





हल्द्वानी हिंसा को लापरवाही और बिन होश के जोश ने हिंसा दी। यही कारण रहा जिससे देवभूमि की संस्कृति में खून के छींटे पड़ गए। उत्तराखंड में कभी हिंसक घटनाओं का इतिहास नहीं रहा, लेकिन हल्द्वानी हिंसा देवभूमि के ललाट पर दाग पर लगा गई।

राज्य के कई इलाकों में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रहती है, लेकिन वह यहां की संस्कृति में रच बस गए हैं। लोगों के घरों के निर्माण करने से लेकर मंदिरों तक की सजावट तक के हर काम में उनका सहयोग होता है। एक सुखद पहलु यह भी है कि भले ही लोग उन्हें रहीम, इकबाल, सुलेमान के नाम से पुकारते हो, लेकिन जब उनके मुख से स्थानीय बोली (गढ़वाली बोली) सुनते हैं तो यह बताता है कि वह किस तरह से यहां कि संस्कृति में घुल मिल गए हैं।

Trending Videos
Haldwani Violence: Uttarakhand has never been a history of violent incidents
पुलिस बल तैनात - फोटो : अमर उजाला

हरिद्वार, रुड़की, ऊधम सिंह नगर जैसे शहरों में पड़ोसी राज्यों से आकर लोग बसे हैं। मिक्स आबादी के चलते यहां सामाजिक ताना-बाना भले बदला हुआ है, लेकिन सभी ने एक दूसरे को अपनाया है। मैदान और पहाड़ दोनों में ही जगह मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं, लेकिन इनके आपसी तालमेल को देखकर यह कहा नहीं जा सकता है कि यह इनका अपना घर नहीं।
 

Haldwani Violence: Uttarakhand has never been a history of violent incidents
बेबस लोग - फोटो : अमर उजाला

उत्तरकाशी सहित कुछ पहाड़ी जिले तो ऐसे हैं जहां कई मुस्लिम परिवारों की पीढ़ियां रही है। लेकिन अचानक इस राज्य की शांति ही भंग हो गई। किसने शांत फिजा का सुकून और खुशी छीन ली। सत्ता और विपक्ष भी इस घटना से हैरान है। क्योंकि देवभूमि में इस घटना की किसी ने कभी कल्पना नहीं की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Haldwani Violence: Uttarakhand has never been a history of violent incidents
हल्द्वानी हिंसा - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड बनने से पहले भी यहां कभी सांप्रदायिक हिंसा का नहीं हुई। उत्तराखंड का मिजाज हमेशा से लोगों को जोड़ने वाला रहा है। इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है पिछले साल उत्तरकाशी के पुरोला में एक घटना के बाद लव जिहाद के मामले ने तूल पकड़ा था। इस दौरान देवभूमि की शांत फिजाओं में नफरत और सांप्रदायिकता का जहर घोलने का प्रयास किया गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों की कई पीढ़ियां यहां बसी थी। यही वजह रही कि लोगों ने एकजुटता दिखाई और शांतिपूर्ण माहौल स्थापित किया गया।

ये भी पढ़ें...हल्द्वानी हिंसा के खौफनाक मंजर: चारों ओर मौत का भय, स्थानीय महिलाओं के सलवार सूट पहनकर बचाई पुलिस ने अपनी जान

विज्ञापन
Haldwani Violence: Uttarakhand has never been a history of violent incidents
हल्द्वानी - फोटो : amar ujala

प्रदेश में पहली बार हिंसा की ऐसी तस्वीर सामने आने के बाद से हर उत्तराखंडवासी स्पब्ध है। सड़कों पर भयावह मंजर, पत्थरों की बारिश, आग की लपटें और गोलियों की आवाज से पूरे शहर की जनता ने भय को महसूस किया।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed