इस गुफा में है अनमोल खजाना: यही रुकी थी शिव बरात, पानी गिरने से बनती हैं आकृतियां, गौरी उडियार की जानें खासियत
1980 में खोदाई के दौरान निकली शिव-पार्वती की शक्ति
पुरकोट गांव के बुजुर्ग श्रीकृष्ण पांडेय बताते हैं कि गौरीउडियार में वैसे तो साल भर लोग पूजा अर्चना कर सकते हैं, लेकिन बैशाख पूर्णिमा और सावन के महीने में पूजा अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। पूर्व में गुफा में लोग मूर्तियों की पूजा करते थे, लेकिन 1980 में जब गुफा की खोदाई की गई तो जमीन के नीचे कुछ आकृतियां नजर आईं। लगातार खोदते रहने पर
वहां भगवान शिव और पार्वती की शक्ति मिली। जिसके बाद से इस स्थान पर शिव-शक्ति की पूजा की जाती है।
कैसे पहुंचे गौरीउडियार
बागेश्वर-कपकोट मोटर मार्ग के बालीघाट से पुरकोट गांव के लिए सड़क कटती है। पुरकोट गांव तक वाहन की मदद से पहुंचा जाता है। जहां से करीब 400 मीटर की दूरी तय कर गौरी नदी किनारे स्थित गुफा तक पहुंच सकते हैं। नदी किनारे पहुंचते ही गुफा के दिव्य दर्शन होते हैं। बड़ी सी गुफा के नीचे श्रद्धालुओं के बैठने के लिए प्रांगण का निर्माण किया गया है। गुफा के एक छोर पर मूर्तियां हैं। गुफा के सिरे पर बने जलकुंड तक जाने के लिए सीढि़यां बनी हैं। पास ही एक अन्य गुफा है, जहां पूर्व में साधु-संत धूनी रमाया करते थे।
पानी गिरने से बनती हैं आकृतियां
गौरी उडियार भी अन्य गुफाओं की तरह चूने की चट्टान पर बनी है। गुफा की छत से पानी टपकने पर चूने की पत्थर आकृतियों का रूप लेती हैं। गुफा के भीतर शिवलिंग के आकार की कई मूर्तियां हनी हुई हैं। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि पूर्व में गुफा के भीतर बने इन लिंगों की मदद से ही लोग गुफा के भीतर तक जाते थे। अब सीढ़ी का निर्माण होने से लोग आसानी से गुफा की ऊपरी सतह तक जाते हैं। गुफा के समीप ही सुरंगनुमा आकृति बनी हैं। दंत कथा है कि पहले गुफा की छत से दूध टपकता था। एक बार एक साधु ने दूध का सेवन कर लिया तब से दूध पानी में बदल गया।
कब और क्यों आएं गौरीउडियार
ग्रामीण गणेश चंद्र पांडेय बताते हैं कि गौरीउडियार जाने के लिए फरवरी से जून और सितंबर से नवंबर का मौसम बेहद मुफीद रहता है। बारिश और ठंड के दिनों में लोगों को मौसम के चलते परेशानी हो सकती है। हालांकि प्रकृति से प्यार करने वाला किसी भी समय यहां आ सकता है। प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से महसूस करने, तनाव भरे जीवन में सुकून के पल तलाशने, एकांत की चाह रखने और कुदरत के करिश्मे को करीब से देखने के इच्छुक लोगों के लिए गौरीउडियार बेहतर विकल्प हो सकता है।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: चीन सीमा पर बनेंगी तीन सुरंग, 57 किमी में सिमट जाएगी दूरी, सेना के साथ आम लोगों को भी सहूलियत
गौरीउडियार की मान्यता और प्राकृतिक सौंदर्य के बारे में सुना है। जल्द ही स्थलीय निरीक्षण कर गौरीउडियार को विकसित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा
जाएगा। - अनुराधा पाल, डीएम बागेश्वर
गौरीउडियार को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। पुरकोट गांव के लिए बनी सड़क को बेहतर बनाने और गुफा तक सड़क का निर्माण कराने की
योजना है। आने वाले समय में गौरीउडियार जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभरकर सामने आएगा। - सुरेश गढि़या, विधायक कपकोट