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इस गुफा में है अनमोल खजाना: यही रुकी थी शिव बरात, पानी गिरने से बनती हैं आकृतियां, गौरी उडियार की जानें खासियत

Thu, 03 Aug 2023 02:00 PM IST
रेनू सकलानी शंकर पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी बागेश्वर
शंकर पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी बागेश्वर Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 03 Aug 2023 02:00 PM IST
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Gauri Udiyar Cave full of natural beauty Bageshwar Shiv Shakti Connection Uttarakhand Watch Photos
गौरी उडियार गुफा - फोटो : amar ujala
प्रकृति ने जिले को अपार सौंदर्य प्रदान किया है। जिले के कई ऐसे धार्मिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण स्थल हैं, जो प्रसिद्ध होते हुए भी पर्यटन की दृष्टि से अनछुए हैं। ऐसे ही स्थलों में शामिल है गौरीउडियार गुफा। जिले से मात्र आठ किमी की दूरी पर स्थित इस गुफा को प्रकृति का अनमोल खजाना कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।


बावजूद इसके शासन और प्रशासन की नजर-ए-इनायत नहीं हुई है। देश, राज्य तो छोड़िये गौरीउडियार गुफा को जिले के पर्यटन मानचित्र पर भी स्थान नहीं मिल सका है। गौरीउडियार गुफा जिले के पुरकोट गांव से बहने वाली गौरी नदी के किनारे स्थित है। गुफानुमा धार्मिक स्थल में भगवान शिव, माता पार्वती, बजरंग बली और भैरव जी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि सदियों पूर्व इस गुफा का निर्माण हुआ होगा। दंतकथाओं में इस गुफा का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से जोड़ा जाता है।

 

कुमाऊंनी में उडियार शब्द गुफा के लिए प्रयोग में लाया जाता है, जबकि माता पार्वती को गौरी के नाम से भी संबोधित किया जाता है। इसके चलते इस गुफा को गौरी मैय्या के मंदिर के नाम से प्रसिद्धि मिली है। पौराणिक मान्यता है कि जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न होकर बरात वापस कैलाश की ओर जा रही थी तो इसी स्थान पर बरात ने पड़ाव डाला था। आज भी गुफा परिसर में एक विशाल पत्थर है, जिसे पार्वती या गौरी की डोली के नाम से जाना जाता है। वहीं कुछ आकृतियों को बरात विश्राम के दौरान के अवशेष के रूप में पहचाना जाता है।

Gauri Udiyar Cave full of natural beauty Bageshwar Shiv Shakti Connection Uttarakhand Watch Photos
गौरी उडियार गुफा - फोटो : amar ujala

1980 में खोदाई के दौरान निकली शिव-पार्वती की शक्ति
पुरकोट गांव के बुजुर्ग श्रीकृष्ण पांडेय बताते हैं कि गौरीउडियार में वैसे तो साल भर लोग पूजा अर्चना कर सकते हैं, लेकिन बैशाख पूर्णिमा और सावन के महीने में पूजा अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। पूर्व में गुफा में लोग मूर्तियों की पूजा करते थे, लेकिन 1980 में जब गुफा की खोदाई की गई तो जमीन के नीचे कुछ आकृतियां नजर आईं। लगातार खोदते रहने पर
वहां भगवान शिव और पार्वती की शक्ति मिली। जिसके बाद से इस स्थान पर शिव-शक्ति की पूजा की जाती है।

Gauri Udiyar Cave full of natural beauty Bageshwar Shiv Shakti Connection Uttarakhand Watch Photos
गौरी उडियार गुफा - फोटो : amar ujala

कैसे पहुंचे गौरीउडियार
बागेश्वर-कपकोट मोटर मार्ग के बालीघाट से पुरकोट गांव के लिए सड़क कटती है। पुरकोट गांव तक वाहन की मदद से पहुंचा जाता है। जहां से करीब 400 मीटर की दूरी तय कर गौरी नदी किनारे स्थित गुफा तक पहुंच सकते हैं। नदी किनारे पहुंचते ही गुफा के दिव्य दर्शन होते हैं। बड़ी सी गुफा के नीचे श्रद्धालुओं के बैठने के लिए प्रांगण का निर्माण किया गया है। गुफा के एक छोर पर मूर्तियां हैं। गुफा के सिरे पर बने जलकुंड तक जाने के लिए सीढि़यां बनी हैं। पास ही एक अन्य गुफा है, जहां पूर्व में साधु-संत धूनी रमाया करते थे। 

पानी गिरने से बनती हैं आकृतियां
गौरी उडियार भी अन्य गुफाओं की तरह चूने की चट्टान पर बनी है। गुफा की छत से पानी टपकने पर चूने की पत्थर आकृतियों का रूप लेती हैं। गुफा के भीतर शिवलिंग के आकार की कई मूर्तियां हनी हुई हैं। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि पूर्व में गुफा के भीतर बने इन लिंगों की मदद से ही लोग गुफा के भीतर तक जाते थे। अब सीढ़ी का निर्माण होने से लोग आसानी से गुफा की ऊपरी सतह तक जाते हैं। गुफा के समीप ही सुरंगनुमा आकृति बनी हैं। दंत कथा है कि पहले गुफा की छत से दूध टपकता था। एक बार एक साधु ने दूध का सेवन कर लिया तब से दूध पानी में बदल गया। 

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Gauri Udiyar Cave full of natural beauty Bageshwar Shiv Shakti Connection Uttarakhand Watch Photos
गौरी उडियार गुफा - फोटो : amar ujala

कब और क्यों आएं गौरीउडियार
ग्रामीण गणेश चंद्र पांडेय बताते हैं कि गौरीउडियार जाने के लिए फरवरी से जून और सितंबर से नवंबर का मौसम बेहद मुफीद रहता है। बारिश और ठंड के दिनों में लोगों को मौसम के चलते परेशानी हो सकती है। हालांकि प्रकृति से प्यार करने वाला किसी भी समय यहां आ सकता है। प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से महसूस करने, तनाव भरे जीवन में सुकून के पल तलाशने, एकांत की चाह रखने और कुदरत के करिश्मे को करीब से देखने के इच्छुक लोगों के लिए गौरीउडियार बेहतर विकल्प हो सकता है।

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गौरी उडियार गुफा - फोटो : amar ujala

गौरीउडियार की मान्यता और प्राकृतिक सौंदर्य के बारे में सुना है। जल्द ही स्थलीय निरीक्षण कर गौरीउडियार को विकसित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा
जाएगा। - अनुराधा पाल, डीएम बागेश्वर

गौरीउडियार को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। पुरकोट गांव के लिए बनी सड़क को बेहतर बनाने और गुफा तक सड़क का निर्माण कराने की
योजना है। आने वाले समय में गौरीउडियार जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभरकर सामने आएगा। - सुरेश गढि़या, विधायक कपकोट

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