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उद्गम गोमुख में अब गंगा के हुए तीन मुख, विशेषज्ञ बता रहे हैं इसे प्राकृतिक प्रक्रिया

Sun, 07 Oct 2018 08:51 AM IST
अभ्युदय कोटनाला, अमर उजाला, उत्तरकाशी
अभ्युदय कोटनाला, अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Sun, 07 Oct 2018 08:51 AM IST
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ganga river origin gaumukh have three waves

मौसम परिवर्तन के चलते साल दर साल बदल रहे गंगोत्री ग्लेशियर के मुहाने व गंगा नदी के उद्गम गोमुख में अब दो नए मुख बन गए हैं। पूर्व में गोमुख के एक मुहाने से निकलने वाली गंगा नदी की धारा अब दो नए मुहानों से भी निकलने लगी है। गोमुख जाने वाले पर्यटक एवं श्रद्धालु तीन मुहाने बनने से गंगोत्री ग्लेशियर के अस्तित्व के प्रति चिंतित हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे प्राकृतिक प्रक्रिया बता रहे हैं। 



 

टूट रहे हिमखंड बने वजह

ganga river origin gaumukh have three waves
Gomukh

गोमुख में बने एक मुहाने से गंगा नदी की धारा निकलती थी, लेकिन उच्च हिमालयी क्षेत्र में बीते कुछ साल से हो रही भारी बारिश व भूस्खलन ने गोमुख का स्वरूप ही बदल दिया है। वहीं हाल ही में गोमुख यात्रा से लौटे देहरादून निवासी ट्रैकर अंशुल बडोनी ने गोमुख में आ रहे बदलावों को लेकर नया खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि लगातार टूट रहे हिमखंडों के कारण गोमुख में अब दो नए मुख बन गए हैं, जिसके चलते गंगा की धारा अब तीन मुहानों से निकल रही है। ग्लेशियर में जमा मलबे के कारण गोमुख के सामने व पीछे की ओर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे गंगोत्री ग्लेशियर के भारी मात्रा में टूटने की आशंका बढ़ गई है। 

 

मौसम से बदला उच्च हिमालय का पर्यावरण तंत्र

ganga river origin gaumukh have three waves
Gomukh

उधर, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के ग्लेशियोलॉजिस्ट डीपी डोभाल ने इसे प्राकृतिक प्रक्रिया बताया है। हालांकि उन्होंने घटना के पीछे बीते वर्ष गोमुख में बनी झील व मौसम परिवर्तन का हाथ होने की संभावना भी जताई है। उन्होंने कहा कि गोमुख में जमा बर्फ सेडिमेंट (छोटे पत्थर) के ऊपर टिकी है, जिससे गंगोत्री ग्लेशियर की अन्य परतों के मुकाबले काफी कच्ची है। ऐसे में गोमुख क्षेत्र में बीते कुछ सालों से हो रही भारी बारिश व भूस्खलन के कारण यह बर्फ आसानी से टूट जाती है। हालांकि बिना सर्वे किए मुहाने बनने के कारणों के बारे में स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।
 

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कम बर्फबारी भी अहम कारण

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gomukh

ग्लेशियोलॉजिस्ट डीपी डोभाल ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग ने उच्च हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण तंत्र में कई बदलाव किए हैं। बीते 20-30 साल की रिपोर्ट के अनुसार गंगोत्री क्षेत्र में पहले 4000 मीटर की ऊंचाई वाले हिस्सों तक साल में मात्र 200 मिलीमीटर तक बारिश होती थी, लेकिन आज 5000 मीटर की ऊंचाई वाले हिस्सों में भी साल में 400 मिमी तक बारिश दर्ज की जा रही है। बर्फबारी कम होने से स्नो (कच्ची बर्फ) को आइस (पक्की बर्फ) बनने का मौका नहीं मिल रहा है। इससे स्नो लाइन पीछे खिसकने लगी है और उसके स्थान पर पेड़ पौधे उगने लगे हैं। 
 

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निचले इलाकों में मच सकती है तबाही

ganga river origin gaumukh have three waves
बीते कुछ सालों में गंगोत्री धाम के पास गंगा भागीरथी में भारी मलबा जमा होने के कारण रीवर बैड काफी ऊंचा हो गया है। दो साल पहले नदी में पानी बढ़ने पर तटवर्ती हिस्सों में काफी नुकसान हुआ था। गोमुख क्षेत्र में जमा मलबा भी बहकर नीचे आ रहा है और गंगोत्री के आसपास जमा हो रहा है। गंगोत्री के तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि मलबे का शीघ्र निस्तारण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में गंगा भागीरथी में उफान आने पर गंगोत्री धाम में तटवर्ती आबादी के साथ ही गंगोत्री मंदिर के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।
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