ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ देशभर में आज़ादी की अलख जगाने वाले मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा कैसे बुलाया जाने लगा क्या जानते हैं आप? नहीं तो यहां जानिए किसने सबसे पहले उन्हें महात्मा की उपाधि दी और उन्हें इस नाम से संबोधित किया।
महात्मा गांधी का उत्तराखंड से बेहद गहरा लगाव था। यहां बापू की आत्मा बसती थी। इस जगह से बापू की अनगिनत यादें जुड़ी हैं। नैनीताल, हल्द्वानी, देहरादून, मसूरी, कुमायूं, अल्मोड़ा सहित लगभग सभी हिस्सों में बापू ने आज़ादी की अलख जगाई थी। पहली बार महात्मा गांधी साल 1915 के अप्रैल महीने में कुम्भ के दौरान हरिद्वार और ऋषिकेश आए थे।
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Gurukul kangri university
बापू यानी मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा नाम हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में मिला था। यह नाम उन्हें गुरुकुल के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद ने दिया था। इस नाम से उन्हें सबसे पहले उन्होंने ही संबोधित किया था।
जानकार बताते हैं कि जिस समय बापू अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे उस वक्त गुरुकुल के ही ब्रह्मचारियों ने गंगा का बांध बनाकर करीब 1500 रुपये इक्कठा कर उन्हें दिए थे। स्वामी श्रद्धानंद ने गांधी जी की सहायता के लिए अफ्रीका भेजी थी।
इसके बाद जब बापू पहली बार गुरुकुल कांगड़ी आए थे तो पहली मुलाकात में स्वामी श्रद्धानंद ने गांधी को महात्मा कहकर पुकारा था, जो हमेशा उनके नाम के साथ जुड़ गया। महात्मा गांधी अपने जीवनकाल में तीन बार गुरुकुल के मेहमान बने। पहली बार 1915 में, दूसरी बार 1916 और तीसरी बार 1926 में बापू गुरुकुल आए।