फादर्स डे मनाने से पहले ही पिता बच्चों का साथ हमेशा के लिए छोड़कर चले गए। शहीद पिता को बच्चे बैठे देखते रहे। उन्हें पता भी नहीं था कि पिता शहीद हो गए हैं। वे अपने दादा से बस यही एक बात पूछते रहे। बच्चों की बातें सुनकर हर किसी की आंखें भर आई।
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martyr manvendra singh family
मानवेंद्र सिंह रावत का शव जैसे ही कविल्ठा गांव पहुंचा, तो परिजन व गांव के हर कोई बिलख उठा। इन सबसे अंजान शहीद का बेटा अनुराग व बेटी जान्हवी कुछ देर यह सब एकटक देखते रहे। कुछ ही देर में दादा के पास जाकर नन्हें बच्चों ने कहा मेरे पापा ऐसे क्यों लेटे हैं। बच्चे के इस सवाल से वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आई, लेकिन मासूम को कोई जवाब नहीं दे पाया।
बता दें कि, शनिवार को बांदीपुरा में आतंकी हमले में शहीद हुए कालीमठ घाटी के कविल्ठा गांव निवासी मानवेंद्र सिंह रावत की सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक घाट पर अंत्येष्टि की गई। शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए कालीमठ घाटी सहित जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों से करीब तीन हजार से अधिक लोग एकत्र हुए।
शनिवार को तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा। शहीद की पत्नी विनीता, मां कमला देवी और पिता नरेंद्र सिंह रावत और छोटा भाई दिग्विजय सिंह रावत शव पर लिपटकर बिलख-बिलख कर रोने लगे।
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शहीद के दो बच्चे भी अपने पिता को एकटक देखते रहे। सेना के 9-माउंटेन बिग्रेड के आठ सदस्यीय यादगार टीम द्वारा घर के आंगन में शहीद को सलामी दी गई और सेना के अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित किए। इसके बाद दोपहर 12.15 बजे पार्थिव शरीर को लेकर सेना के जवान, परिजन व ग्रामीण पैतृक घाट पर गए। इस दौरान शहीद की अंतिम यात्रा में ग्रामीणों का सैलाब उमड़ पड़ा।