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नोटबंदी के फैसले पर देश के रक्षकों की ये बात सुन गौरवांवित होगा हर भारतीय

Fri, 18 Nov 2016 03:24 PM IST
कौशलेंद्र सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
कौशलेंद्र सिंह/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 18 Nov 2016 03:24 PM IST
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ex army man supports pm modi currency ban decision
सेना

नोटबंदी पर हो रहे सियासी होहल्ले के बीच 1962 की जंग के वीर केंद्र सरकार के इस फैसले का भरपूर समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कालेधन के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक है और उन्हें देश के लिए हर परेशानी मंजूर है।

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virendra singh negi - फोटो : amar ujala

4 गढ़वाल राइफल्स के शौर्य दिवस पर जुटे पूर्व फौजियों ने एक स्वर में इस फैसले का समर्थन किया। 9 महीने चीन की जेलों में कैद रहे इन वीरों का कहना है कि यह परेशानी तो कुछ भी नहीं, हम तो देश पर अपनी जान न्यौछावर करने का जज्बा रखते हैं। कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही लड़ाई में हर नागरिक को एक सिपाही की तरह बर्ताव करना चाहिए। 
 

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bp barthwal

सड़क भी बनती है तो परेशानी होती है। फिर यह तो देश में फैली भ्रष्टाचार की गंदगी की सफाई हो रही है। नोटबंदी से हो रही परेशानी को फौजी के नजरिये से देखेंगे तो यह कुछ भी नहीं है। मैंने 1962, 1965, 1971 की लड़ाई में हिस्सा लिया। फौजी देश के लिए सबकुछ न्यौछावर कर देते हैं और उफ तक नहीं करते। क्योंकि देश सेवा ही उनका धर्म है। नोटों पर पाबंदी से कुछ दिक्कत जरूर हो रही है, लेकिन देश की तरक्की के लिए हम कोई भी परेशानी उठाने के लिए तैयार हैं। 
-कर्नल बीपी बड़थ्वाल (सेवानिवृत्त)
 

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jr binjola

1962 की लड़ाई में हम कई दिन जंगल में रहे। कपड़ों के जूतों में बर्फ के पहाड़ पार किए। एक कंबल के सहारे खून जमा देने वाली ठंड बर्दाश्त की। यह हम इसलिए कर पाए, क्योंकि देशभक्ति हमारी रगों में थी। इस समय देश भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ रहा है। मेरी उम्र 83 साल हो चुकी है, लेकिन पूरे दिन भी बैंक में लाइन में खड़ा होना पड़े तो खड़ा हो जाऊंगा। मानता हूं, समस्या है, लेकिन देश के लिए मैं कुछ भी सह और कर सकता हूं। 
-ऑनेरी कैप्टन जेआर बिन्जौला (सेवानिवृत्त)
 

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birendra singh rawat

1962 की लड़ाई के बाद मैं और मेरे कई साथी 9 महीने चीन की जेल में रहे, तमाम परेशानियां झेलीं। लेकिन, देशभक्ति के जज्बे ने हौसला नहीं टूटने दिया। काले धन के खिलाफ हुई इस सर्जिकल स्ट्राइक में देश के हर ईमानदार नागरिक को एक सिपाही की तरह पेश आना चाहिए। इस जंग में छोटी-मोटी परेशानियों को हमें पूरे हौसले के साथ झेलना होगा। क्योंकि जंग कामयाब हुई तो आने वाली पीढ़ियों को भ्रष्टाचार मुक्त देश मिलेगा। परेशानी जरूर है, लेकिन देश के हित में तो हम जान भी न्यौछावर कर सकते हैं। 
-सूबेदार बीरेंद्र सिंह रावत (सेवानिवृत्त)
 

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