एक जुलाई, 2016 को पिथौरागढ़ में बस्तड़ी की आपदा के बाद अब प्रदेश के अन्य सुरक्षित गांव भी अब खतरे की जद में माने जा रहे हैं। राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र की हाल की एक भू अध्ययन रिपोर्ट इस ओर इशारा भी कर रही है।
बड़ी खबरः उत्तराखंड के हर गांव पर मंडरा रहा है आपदा का खतरा!
रिपोर्ट में कुछ समय पहले ही बस्तड़ी के आसपास सड़क निर्माण से पहाड़ी के कमजोर होने और पोर प्रेशर सहन न कर पाने से ढहने की आशंका जताई गई है। केंद्र ने इस रिपोर्ट में बस्तड़ी और आसपास के प्रभावित दर्जन भर गांवों में पिछले पांच सालों में भू उपयोग में किए गए बदलाव की पड़ताल करने का सुझाव दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक बस्तड़ी पूरी तरह से सेफ जोन में था। पहले भी यहां पर भारी बरसात हुई पर लोगों को कभी भूस्खलन का सामना नहीं करना पड़ा। बस्तड़ी गांव के ऊपर ही करीब 50 डिग्री का ढाल है और एक जुलाई को हुई भारी बारिश से यह पहाड़ी दरक गई। ढाल के कारण बस्तड़ी तक मलबे को पहुंचने में बेहद कम समय लगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बस्तड़ी से आए मलबे ने नरोला गांव के निकट कुमालगांव को भी अपनी जद में लिया। इससे पाथेरकोट मल्ला और तल्ला, उरमा, औझा मल्ला, सिरोली, मझेरा, ताल, सूनाकोट, अमथल, दाफिला, कलाशिला, पंतसेरा, डीडीहाट कस्बा भी प्रभावित हुआ।
इस क्षेत्र में हुए भूस्खलन का एक कारण सड़क निर्माण और अन्य भू उपयोग परिवर्तन भी हो सकता है। इससे पहाड़ी कमजोर हुई और भारी बारिश के कारण पहाड़ी पोर प्रेशर (रिस गए पानी का दबाव) को सहन नहीं कर पाई। रिपोर्ट में बस्तड़ी और आसपास के गांवों के पिछले पांच साल में भू उपयोग परिवर्तन, सड़क निर्माण, पानी की निकासी के रास्तों में बदलाव, नए मकान, पिछले पांच साल में हुए अन्य बदलावों के अध्ययन पर जोर दिया गया है।