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यहां बसा है बौने पौधों का संसार, जुरासिक युग की प्रजाति भी शामिल, तस्वीरों में देखिए ये अनोखा बाग

Thu, 18 Jul 2019 05:54 PM IST
अलका त्यागी आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 18 Jul 2019 05:54 PM IST
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Dwarf Tree Garden in dehradun Exclusive Photos 
बौने पौधों का संसार - फोटो : अमर उजाला

पीपल और बरगद जैसे विशालकाय पेड़ को कभी आपने बौने रूप में देखा है। नहीं तो चलिए आपको दिखाते हैं ऐसी अनोखी बगिया जहां एक नहीं कई पौधे आपको बौनी शक्ल में दिखेंगे। यहां तक कि एक तो जुरासिक युग की प्रजाति का भी है। तस्वीरों में देखिए...

Dwarf Tree Garden in dehradun Exclusive Photos 
बौने पौधों का संसार - फोटो : अमर उजाला

देहरादून शहर में मेजर अशोक कुमार (रिटायर्ड) ने बौने पौधों का पूरा ‘संसार’ बसा रखा है। ऐसा ‘संसार’ जिसमें बरगद और पीपल जैसे पेड़ भी बौनी शक्ल में नजर आते हैं। हम बात कर रहे हैं मेजर अशोक के बोन्जाई गार्डन की। उनके इस जुनून को देश ही नहीं दुनिया के कई देश सलाम कर रहे हैं। जापान ने तो पूरी दुनिया में उनके बोन्जाई पौधों को प्रथम पुरस्कार से नवाजा था।

Dwarf Tree Garden in dehradun Exclusive Photos 
बौने पौधों का संसार - फोटो : अमर उजाला

वसंत विहार निवासी मेजर अशोक सेना में चोटिल होने के बाद दिव्यांगता का शिकार हो गए थे। लिहाजा, उन्होंने सेना से वीआरएस ले लिया। उसके बाद उन्होंने ओएनजीसी ज्वाइन किया। एक बार जब वह अमेरिका गए तो उन्होंने वहां बोन्जाई पौधे देखे थे। वहीं से उन्हें इनका शौक पैदा हुआ। घर आए तो पौधों को बोन्जाई बनाने का अभ्यास शुरू किया। आसान न था, लेकिन खुद किताबें पढ़ी। बोन्जाई की दुनिया को समझा और शुरू हो गए। अब 35 साल बीत गए। आज उनकी बगिया को 60 से ज्यादा प्रजातियों के पौधे महका रहे हैं।

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Dwarf Tree Garden in dehradun Exclusive Photos 
बौने पौधों का संसार - फोटो : अमर उजाला

मेजर अशोक ने जो बोन्जाई तैयार किए हैं, उन्हें वर्ष 2006-07 में जापान में हुए वर्ल्ड बोन्जाई कांटेस्ट में शामिल किया गया था। अपने दो बोन्जाई की 3-डी तस्वीरें उन्होंने इस प्रतियोगिता में भेजीं। दुनियाभर से आई एंट्री में से मेजर अशोक के दो बोन्जाई को दुनिया के श्रेष्ठ बोन्जाई माना गया। मेजर अशोक ने बताया कि इनमें से फाइकल लॉंग आईलैंड और फाइकस इक्विस्टी फोलिया बोन्जाई ने यह अवार्ड जीता था।

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Dwarf Tree Garden in dehradun Exclusive Photos 
बौने पौधों का संसार - फोटो : अमर उजाला

मेजर अशोक के एक गमले में जुरासिक युग का जिंको बाइलोबा पौधा भी बोन्जाई रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि जुरासिक युग की यह अकेली प्रजाति मानी जाती है। बताया, जब आजादी के बाद अंग्रेज देहरादून छोड़कर गए थे तो शहर में केवल 16 पौधे ही इस प्रजाति के बचे थे। उन्होंने विशेष प्रयास करके ही इसकी प्रजाति को बोन्जाई बनाया है। अब शहर में कई जगहों पर जिंको बाइलोबा की प्रजाति देखी जा सकती है।

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