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पीरियड्स आने पर यहां औरतों के साथ किया जाता है 'जानवरों' जैसा सुलूक, पढ़ेंगे तो यकीन नहीं होगा

Sat, 14 Apr 2018 12:20 PM IST
भक्त दर्शन पांडेय, बागेश्वर
भक्त दर्शन पांडेय, बागेश्वर Updated Sat, 14 Apr 2018 12:20 PM IST
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during menses women treat like animal
periods - फोटो : getty
पीरियड्स को लेकर दुनियाभर में अलग-अलग रुढ़ियां प्रचलित है। लेकिन यहां पीरियड्स आने पर महिलाओं से 'जानवरों' जैसा सुलूक किया जाता है।
during menses women treat like animal
हिल काका एलओसी के पास सटा हुए एक गांव है - फोटो : File
दुनिया बदली, परंपराएं, रूढ़ियां, सोच सब कुछ बदला लेकिन बागेश्वर जिले के मल्ला दानपुर के कई गांवों की परंपरा नहीं बदली। यहां आज भी मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के साथ भेदभाव होता है। उनके साथ छुआछूत का व्यवहार किया जाता है। 21वीं सदी में जहां बेटियां आसमान छू रही हैं वहीं इन गांवों में मासिक धर्म होने पर किशोरियों और महिलाओं को जानवरों के गोठ में रखा जा रहा है। उनको कम से कम चार रातें गौशाला में गुजारनी पड़ती हैं।

 
during menses women treat like animal
uttarakhand hill a view
ऐसा नहीं है कि मल्ला दानुपर दुनिया से कटा हुआ है। यहं के लोग देश के कोने-कोने में हैं  और बहुत से लोग तो विदेश में भी हैं। लेकिन ग्राम्य समाज आज भी रूढ़िवादी परंपरा से बाहर नहीं निकल सका है।

 
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Periods - फोटो : Reuters
उच्च हिमालय से लगा होने के कारण इस क्षेत्र में आठ माह तक कड़ाके की ठंड पड़ती है। ऐसे में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान सीमित गर्म कपड़ों में जानवरों के गोठ (गौशाला) में पुआल के बिछौने पर सर्द रातें गुजारनी पड़ती हैं। कई घरों में तो महिलाएं दिन के समय घर में प्रवेश कर सकती हैं लेकिन कुछ घर ऐसे भी हैं जहां चार दिनों तक प्रवेश नहीं करने दिया जाता।

 
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गुमदेश के चैतोला मेले के समापन पर झोड़ों का गायन करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
पर्वतीय क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को अछूत माना जाता है। कम से कम चार दिनों तक महिलाओं को घर के एक कमरे में अलग रखा जाता है। इस दौरान रसोई और देवालयों में प्रवेश वर्जित रहता है। पांचवें दिन गोमूत्र से शुद्धीकरण के बाद ही सामान्य रूप से कामकाज की अनुमति होती है। लेकिन मल्ला दानपुर क्षेत्र में महिलाओं को घर में ही प्रवेश की अनुमति नहीं होती है।
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