Diwali 2017: इस समय भूलकर भी न करें लक्ष्मी-कुबेर की पूजा, होता है अशुभ
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इस दिन शाम 5.38 बजे से 8.14 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। शाम 7.05 बजे से रात 9 बजे तक वृष लग्न में पूजा करना विशेष शुभप्रद रहेगा। शाम 5.40 बजे से 7.18 बजे तक अमृत की चौघड़िया रहने से इस योग में दीपदान, महालक्ष्मी, गणेश कुबेर पूजन, बहीखाता पूजन शुभ रहेगा।
19 अक्तूबर को प्रात: 7.18 बजे तक हस्त-नक्षत्र एवं इसके पश्चात चित्रा-नक्षत्र लगेगा। पंडित भगवती प्रसाद थपलियाल के अनुसार दीपावली पर प्रदोष काल से लेकर अर्धरात्रि तक महालक्ष्मी पूजन मंत्र, जप, अनुष्ठान आदि करने का महत्व होता है।
इस दिन श्री गणेश जी सहित लक्ष्मी-कुबेर आदि का पूजन करना चाहिए। आचार्य डॉ.सुशांत राज के अनुसार अमावस्या तिथि 18 अक्तूबर को रात्रि 12.10 बजे लगेगी जोकि 19 अक्तूबर को रात 12.32 बजे तक रहेगी। दीपावली पूजन में अमावस्या तिथि, प्रदोष निशीथ और महानिशीथ काल का विशेष महत्व होता है। जो लोग प्रदोष काल में पूजन नहीं कर सकते, वह निशीथ एवं महानिशीथ काल में पूजा कर सकते हैं।