उत्तराखंड में सीमांत के धारचूला और मुनस्यारी में वन विभाग ने आजीविका संवर्द्धन, पलायन रोकने और रोजगार के वैकल्पिक अवसर बढ़ाने के लिए अभिनव प्रयोग किया है। मुनस्यारी के पातलथौड़ के 30 हेक्टेयर क्षेत्र में इको पार्क विकसित किया है। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ी हैं। यहां पर आपदा रोधी 10 आधुनिक हटों का निर्माण भी किया गया है। ऐसी आपदा रोधी इको हट पूरे देश में सिर्फ यहीं स्थित हैं।
विश्व की सर्वाधिक ऊंचाई 9000 फुट पर ट्यूलिप गार्डन का सफल प्रदर्शन वन विभाग इको पार्क में पिछले वर्ष कर चुका है। अब विभाग इसका विस्तार करने की दिशा में काम कर रहा है। मुनस्यारी के इसी इको पार्क में उत्तराखंड वन विभाग ने पहला पक्षी पर्यटन आधारित ग्रोथ सेंटर भी विकसित किया है।
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आपदा रोधी इको हट
- फोटो : फाइल फोटो
मुनस्यारी में ही 1200 वर्गमीटर के क्षेत्र में ट्यूलिप गार्डन भी तैयार किया गया है। इस पार्क में हट के साथ टेंट में रहने की सुविधा भी उपलब्ध है। इस परियोजना के लिए 7000 ट्यूलिप बल्ब हॉलैंड से मंगवाए गए हैं।
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आपदा रोधी इको हट
- फोटो : अमर उजाला
हट के माध्यम से बेरोजगार युवाओं का विभिन्न विषयों में कौशल विकास कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। वन विश्राम भवन द्वारा मुनस्यारी को परंपरागत रूप से जीर्णोद्धार कर पर्यटकों के लिए बेहतरीन सुविधा बढ़ाई गई है। धारचूला के गलाती में अंतरराष्ट्रीय स्तर का परंपरागत शैली से उत्तराखंड के पहले कीड़ा जड़ी एवं जड़ी बूटी व्यापार विपणन केंद्र की स्थापना की जा रही है।
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आपदा रोधी इको हट
- फोटो : अमर उजाला
इसमें धारचूला विधानसभा क्षेत्र की 114 ग्राम पंचायतें लाभान्वित होंगी। धारचूला और मुनस्यारी में वन विभाग के अभिनव प्रयोग के बाद वहां पर्यटन गतिविधियां बढ़ी हैं। साथ ही स्वरोजगार के नए संसाधन भी विकसित हुए हैं। लोगों ने वन विभाग के कार्यों की सराहना की है।
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आपदा रोधी इको हट
- फोटो : अमर उजाला
सीमांत के धारचूला और मुनस्यारी में वन विभाग ने आजीविका संवर्द्धन, पलायन रोकने और रोजगार के वैकल्पिक अवसर विकसित करने के लिए कई कार्य किए गए हैं। इको पार्क मुनस्यारी में आपदा रोधी 10 आधुनिक हट्स का निर्माण कार्य भी किया गया है, जो देश में पहली बार हुआ है।
- डॉ. विनय भार्गव, डीएफओ, पिथौरागढ़।