देहरादून व टिहरी जिले में 19 अगस्त को प्राकृतिक आपदा से हुई जानमाल की हानि को कुछ हद तक कम किया जा सकता था, लेकिन सरकारी सिस्टम सोया रहा। उच्चाधिकारियों के स्तर पर सवाल उठने के बाद अब मौसम विज्ञान विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी एक-दूसरे के आमने-सामने हैं और एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
सिस्टम सो रहा था: देहरादून-टिहरी आपदा पर आपदा प्रबंधन और मौसम विभाग आमने-सामने, एक-दूसरे को ठहरा रहे जिम्मेदार
मौसम विज्ञान विभाग की मानें तो पहले नैनीताल, चंपावत, यूएसनगर और देहरादून के लिए यलो एलर्ट जारी किया था। लेकिन, 19 अगस्त की रात नौ बजे इसे ऑरेज अलर्ट में तब्दील कर इसमें टिहरी और पौड़ी जिले को भी जोड़ दिया गया। इस अलर्ट में अगले तीन घंटे भारी बारिश बताई गई। प्रदेश में इस दौरान तेज बारिश पहले से जारी थी। तीन घंटे बीतने के बाद रात 12 बजकर 49 मिनट पर अगले तीन घंटों के लिए फिर अलर्ट जारी किया गया और इसमें नैनीताल जिला भी जोड़ दिया गया। रात दो बजकर 39 मिनट पर कंट्रेाल रूम को सरखेत में अतिवृष्टि की सूचना मिल चुकी थी।
इसके बाद सुबह तीन बजे फिर अलर्ट जारी किया गया और इन सभी जिलों के साथ अल्मोड़ा और चंपावत भी जोड़ दिए गए। इधर, आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि बहुत कम समय में जो अलर्ट प्राप्त हुए, वह पीडीएफ फॉर्मेट में थे। इसमें जिला तो बताया गया था, लेकिन चिह्नित स्थलों का जिक्र नहीं था। यदि मौसम विज्ञान विभाग जीआईएस बेस्ड वेब मैप के जरिये सूचना भेजता तो उससे लोकेशन भी पता लग जाती। इसके बाद संबंधित क्षेत्र विशेष में अलर्ट जारी किया जा सकता था।
19 अगस्त की रात हमने हर तीन घंटे में अलर्ट जारी किए। इसमें यलो जोन, रेड जोन भी अंकित किए गए थे। इतना ही नहीं ड्यूटी ऑफिसर की ओर से तीन बार फोन कर भी सूचना दी गई थी। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में उस वक्त जो भी कर्मचारी-अधिकारी ड्यूटी पर रहा होगा, उसकी जिम्मेदारी बनती थी कि वह सूचना को आगे प्रेषित करे।- बिक्रम सिंह, निदेशक, मौसम विज्ञान विभाग केंद्र
मौसम विज्ञान विभाग की ओर से हमें जो अलर्ट मिले, वह जिलेवार थे। उसमें कहीं भी पिन प्वाइंट अंकित नहीं थे। यदि ऐसा होता तो संबंधित स्थानों पर लोगों को अलर्ट कर दिया जाता। इस संबंध में शासन में हुई बैठक में यह बात पहले ही स्पष्ट हो चुकी है। आगे से मौसम विज्ञान विभाग से डब्ल्यूएमएक्स फॉर्म में यह जानकारी आपदा प्रबंधन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि इसे जीआईएस मैप के साथ ओवरलैप किया जा सके। - डॉ.रंजीत सिन्हा, सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग