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पिथौरागढ़ आपदा: अब तक मिल चुके नौ शव, भूस्खलन के डर से कहीं टैंट तो कहीं गुफा में रात बिता रहे ग्रामीण

Thu, 23 Jul 2020 10:50 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़/मुनस्यारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़/मुनस्यारी Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 23 Jul 2020 10:50 PM IST
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Disaster in Pithoragarh Uttarakhand: Nine Dead bodies Recovered till now, villagers spent night in tent
- फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में टांगा और धापा गांव के लोगों के जगन में कोरोना वायरस का खौफ अब दूर-दूर तक नहीं है, क्योंकि वे अतिवृष्टि और भूस्खलन के रूप में कुदरत के दिए गहरे जख्मों से सदमे में हैं। टांगा में 19 को बरसी आसमानी बारिश से जमींदोज घरों के मलबे से नौ शव निकाले जा चुके हैं, अभी दो लोग लापता हैं। पूरी तरह तबाह हो चुके गांव के लोग भूस्खलन के भय से गांव के बाहर प्लास्टिक के टैंट में रात गुजार रहे हैं। 

Disaster in Pithoragarh Uttarakhand: Nine Dead bodies Recovered till now, villagers spent night in tent
- फोटो : अमर उजाला

यही हाल धापा गांव का है। 47 परिवारों ने मकान छोड़ दिए हैं। ये सभी परिवार जंगल में टेंट लगाकर रह रहे हैं। कुछ लोगों ने गुफा की शरण भी ली है। सामान भी गुफाओं में रखा है। टांगा, गैला, धापा और इन जैसे तमाम सीमांत गांवों के लिए 19 जुलाई की रात आसमान से बरसी आफत तबाही लेकर आई। भारी बारिश के चलते कच्चे पहाड़ों से हुए भूस्खलन से खेत तो मलबे से पटे ही कई घर भी जमींदोज हो गए। 

Disaster in Pithoragarh Uttarakhand: Nine Dead bodies Recovered till now, villagers spent night in tent
- फोटो : अमर उजाला

गैला में मकान ध्वस्त होने से एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई और पांच लोग घायल हो गए। टांगा में तो तबाही का मंजर और भी भयानक रहा। यहीं तीन घर ध्वस्त होने से इन परिवारों के 11 लोग मलबे में दब गए। इनमें से बृहस्पतिवार शाम तक नौ लोगों के शव मलबे से निकाले जा चुके हैं। दो लोग अभी तक लापता हैं। गांवों में रह-रहकर भूस्खलन हो रहा है। 

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Disaster in Pithoragarh Uttarakhand: Nine Dead bodies Recovered till now, villagers spent night in tent
- फोटो : अमर उजाला

इस हादसे के बाद टांगा गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला है। सभी ग्रामीण सामूहिक रूप से एक आंगन में भोजन कर रहे हैं। ग्रामीण पिछले पांच दिन से अपनी रातें लगभग 300 मीटर की दूरी पर लगाए गए प्लास्टिक के टैंट में बिता रहे हैं। गांव के भगत सिंह और गोविंद सिंह ने बताया कि जहां पर टैंट लगाए गए हैं वहां पर भी अब नदी की ओर से भूस्खलन होने लगा है। 

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Disaster in Pithoragarh Uttarakhand: Nine Dead bodies Recovered till now, villagers spent night in tent
- फोटो : अमर उजाला

इनके अलावा धापा सहित कई गांवों में भूस्खलन के कारण भारी नुकसान हुआ है। धापा के 47 परिवारों ने मकान छोड़ दिए हैं। ये सभी परिवार जंगल में टेंट लगाकर रह रहे हैं। गुफाओं में सामान रखा गया है। मवेशी बांज के पेड़ों से खुले में बंधे हैं। रात को भी पहाड़ी से पत्थर गिरने से ग्रामीण ठीक से सो नहीं पा रहे हैं। 

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