घर में बच्चे भूख से बिलख रहे थे और बाप पत्नी के इलाज के नाम पर कर्ज की रकम लेकर मौज कर रहा था। एक दिन उसने अपने परिवार के साथ जो किया सुनकर रूह कांप जाए।
आमदनी का कोई नियमित जरिया न होने के बावजूद अंशुमान अपने ऊपर धड़ल्ले से खर्च करता था। यह जानते हुए भी उसके बच्चे और बीवी घर पर फाकाकशी से जूझ रहे हैं, इसके बावजूद उधार लेकर उसकी शाहखर्ची जारी थी। बच्चों और पत्नी का क्या दोष, जिसे जहर भी भूखे पेट गटकने को विवश होना पड़ा।
अंशुमान ने तो पूरे परिवार का कत्ल करने की ठानी थी। लेकिन दो मासूम बच्चे उसकी जघन्य साजिश का शिकार होने से बच गए। वारदात को अंजाम देने से पहले अंशुमान ने अपने व पत्नी के मोबाइलों के सिम तोड़कर फेंक दिए, ताकि कोई किसी से मदद की गुहार न लगा सके। उसने पत्नी सरिता के बाद बेटियों के मुंह में एक-एक कर सल्फास की गोलियां ठूंस दी और गोलियां निगलने तक उनके मुंह बंद रखे। गोली कड़वी लगने पर छोटी बेटी आर्या ने सल्फास थूक दी। जिससे उस पर दवा का असर कम रहा और उसने अपने इकलौते बेटे को जबरन सल्फास खिलाने का प्रयास किया। विरोध करने पर उसे पीटा भी, लेकिन उसका बेटा पिता से हाथ छुड़ाकर भाग निकला। उसने गृहस्वामी को घटना के बारे में जानकारी देते हुए उन्हें सल्फास की गोली भी दिखाई। तब कहीं जाकर उन्हें विश्वास हुआ।
ग्राम हरियावाला निवासी अतुल यादव के मकान के जिस कमरे में अंशुमान व उसकी पत्नी ने दम तोड़ा, उस कमरे की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। घरेलू सामान के नाम पर करीब दो दर्जन छोटे-बड़े बर्तन, एक छोटा और एक बड़ा पुराना तख्त, चंद पुराने कपड़ों के अलावा घरेलू सामान के कुछ थेले कमरे की कानस पर रखे थे। सारा सामान एक गठरी में आसानी से बांधा जा सकता है। एक ही कमरे में रसोई और वहीं रहना सहना। कमरे का किराया 1300 रुपये माहवार था, जो उसने पिछले दो माह से अदा नहीं किया है।
मकान मालकिन सुमन बताती है कि किराए के लिए सख्ती करने पर बेटियां गिड़गिडाने लगती थीं। ऐसे में उन पर तरस आ जाता था। अंशुमान की पत्नी पहले पास की एक फैक्ट्री में काम करती थी। कहीं से कुछ रुपयों का जुगाड़ हुआ तो उसने पत्नी की नौकरी भी छुड़वा दी। पत्नी बीमार रहने लगी, लेकिन उसने पत्नी को अस्पताल में दिखाने के बजाय कर्ज की रकम से अपनी मौज मस्ती जारी रखी। पड़ोसी बताते हैं कि अंशुमान यहां अभिषेक के नाम से जाना पहचाना जाता था।