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हरिद्वार कुंभ 2021: 13 अप्रैल की रात इस समय बनेगा कुंभ का पूर्ण ग्रहयोग, ऐसे आता है 11वें साल में महाकुंभ

Wed, 07 Apr 2021 09:32 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 07 Apr 2021 09:32 PM IST
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Coronavirus in uttarakhand: Kumbh Yog will be formed on night of 13 April, Know Interesting Facts
हरिद्वार कुंभ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

हरिद्वार में पांच अप्रैल की मध्य रात्रि 12.23 बजे से देव गुरु बृहस्पति कुंभ राशि मे प्रवेश कर गए है। यहीं से कुंभ पर्व का पहला चरण शुरू हो गया है। कुंभ का पूर्ण ग्रहयोग 13 अप्रैल की रात्रि 2.33 बजे पर उस वक्त बनेगा जब सूर्य मेष राशि मे प्रवेश कर जाएंगे। इसके बाद ही सही मायनों में कुंभ स्नान का मुहूर्त बनेगा। 



ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी का कहना है कि इसी दिन नव संवत्सर की शुरुआत होगी। संक्रांति भी होगी। इसी दिन अमृत की चौघड़िया सुबह 7.28 बजे से 9:05 बजे तक रहेगी। इसी दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.54 बजे से दोपहर 12.42 बजे तक होगा।

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प्रतीक मिश्रपुरी के मुताबिक यही कुंभ के स्नान का सर्वोत्तम योग होगा। कुंभ का यह दुर्लभ योग लगभग एक माह तक रहेगा। यानी कुंभ का यह ग्रह योग 14 मई की अर्द्धरात्रि तक बना रहेगा। इस अवधि तक गंगा में कुंभ स्नान का पुण्यफल प्राप्त होगा।

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार 14 अप्रैल का स्नान ही वास्तविक कुंभ स्नान होगा और सबसे महत्वपूर्ण होगा। इसके बाद 21 अप्रैल को रामनवमी, 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा, 11 मई को भौमवती अमावस्या और 14 मई को अक्षय तृतीया को भी कुंभ के स्नान बताया गया है। 

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हरिद्वार कुंभ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

प्रत्येक 12 साल में कुंभ का योग बनता है। मगर हमेशा ऐसा नही होता है। क्योंकि हरिद्वार का कुंभ पूरी तरह से बृहस्पति और सूर्य की गति पर आधारित है। इस बार यह ग्रह योग 11 साल बाद बना है। ज्योतिषाचार्य डॉ. मिश्रपुरी ने बताया कि कुंभ देव गुरु बृहस्पति की गति पर निर्भर करता है, जो कि कुंभ के बाद 12 राशियों के ऊपर से गुजरते हुए 12वें साल में पुन: कुंभ राशि मे प्रवेश करते हैं।

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हरिद्वार कुंभ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

यानी गुरु लगभग एक वर्ष तक एक राशि मे रहते हैं। वापस उसी राशि मे आने के लिए उसे 11 साल 87 दिन लगते हैं। प्रतीक मिश्रपुरी बताते हैं, हर ग्रह का पूरा राशि चक्र घूमने का अलग-अलग समयकाल है। इसी तरह देव गुरु बृहस्पति को कुंभ राशि से कुंभ राशि में वापस लौटने में 4333 दिन लगते हैं।

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हरिद्वार कुंभ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
यह देवगुरु बृहस्पति की गति है जिसके अनुसार कुंभ पर्वों के काल का निर्णय होता है। इस हिसाब से प्रत्येक सात कुंभ के बाद कुंभ 83 वर्षों में आ जाता है ना कि 84 वर्षों में। यानी हर सात कुंभ के बाद कुंभ का समयकाल 12 वर्ष के बजाय एक वर्ष घटकर 11 साल रह जाता है। 
 
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हरिद्वार कुंभ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

2021 से पहले इस तरह का ग्रहयोग साल 1938, 1855 के बना था। वैसे तो कुंभ भारत में चार स्थानों पर लगता है, लेकिन हरिद्वार के कुंभ को सबसे खास माना जाता है। कुंभ का इतिहास भी हरिद्वार का ही माना जाता है। अमृत कलश से सबसे पहले अमृत हरिद्वार में ही छलका था।

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