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CWG 2022: छह साल की उम्र में ही लक्ष्य का 'लक्ष्य' देख हैरान हो जाते थे लोग, अब भारत को दिलाया गोल्ड

अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 08 Aug 2022 05:50 PM IST
लक्ष्य सेन
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एक लक्ष्य मेरा कि लक्ष्य से निगाह न हटे, बढ़ता हूं आगे, चाहे मुश्किलें हजार आ डटे। ये लाइनें शटलर लक्ष्य सेन पर सटीक बैठती हैं। थॉमस कप में 73 साल बाद जीत दर्ज करने वाली भारतीय बैडमिंटन टीम के सदस्य लक्ष्य सेन ने अपने 'लक्ष्य' से न चूकते हुए आज कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को गोल्ड दिलाया। लक्ष्य सेन ने पुरुष एकल के फाइनल में मलेशिया एंग जे यॉन्ग को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया है। उनका राष्ट्रमंडल खेलों में यह पहला पदक है। 

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उनकी इस जीत के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और उनके पिता व कोच डीके सेन का बड़ा हाथ है। लक्ष्य के पिता डीके सेन बैडमिंटन के जाने-माने कोच हैं और वर्तमान में प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हैं। पिता की देखरेख में लक्ष्य ने होश संभालते ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। वह चार साल की उम्र में ही स्टेडियम जाने लगे थे। छह-सात साल की उम्र में ही उनका खेल देखकर लोग हैरान हो जाते थे। लक्ष्य की दसवीं तक की पढ़ाई अल्मोड़ा के बीरशिवा स्कूल में ही हुई। 
लक्ष्य सेन
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कॉमनवेल्थ के लिए जाने से पहले अमर उजाला से बात चीत में लक्ष्य सेन ने बताया था कि अभ्यास के बीच जब भी फुरसत मिलती है, तो संगीत जरूर सुनता हूं, उससे मेरे भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होता है। कॉमनवेल्थ को लेकर अतिरिक्त होगा, लेकिन सपोर्टिंग स्टॉफ काफी बेहतर है, जो मुझसे ज्यादा मेरी फिक्र करते हैं।
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लक्ष्य सेन
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2018 में लक्ष्य ने जूनियर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप अपने नाम की थी। उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा है। वह लगातार बड़े टूर्नामेंट में जीत हासिल कर रहे हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप और थॉमस कप पदक के बाद अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी पदक अपने नाम कर लोहा मनवाया है।
लक्ष्य सेन
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लक्ष्य सेन को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए उनके पिता डीके सेन ने दिन-रात एक कर दिया। डीके सेन ने अपने दोनों बेटों को बेहतर बैडमिंटन खिलाड़ी बनाने के लिए अल्मोड़ा तक छोड़ दिया और बेंगलुरु चले गए। लेकिन अल्मोड़ा से उनका रिश्ता अब भी है। 
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लक्ष्य के दादा सीएल सेन बैडमिंटन के एक बेहतरीन खिलाड़ी थे। उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताएं जीतीं थीं। उनकी लगन और जज्बे के कारण अल्मोड़ा में बैडमिंटन को बढ़ावा मिला। इसी के चलते उन्हें अल्मोड़ा में बैडमिंटन का पुरोधा भी माना जाता है। उस विरासत को अब लक्ष्य ने आगे बढ़ाया है। उन्होंने सिर्फ राज्य या देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। लक्ष्य सेन के बड़े भाई चिराग सेन भी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। 
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