उत्तराखंड के उत्तरकाशी में मोरी ब्लाक के आराकोट क्षेत्र में शनिवार देर रात बादल फटने से कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों मकान पानी के सैलाब में समा गए। रविवार देर शाम तक आराकोट और माकुड़ी से आठ लोगों के शव बरामद हो चुके थे। जबकि क्षेत्र में अलग-अलग जगह 15 से 17 लोगों के बहने और मलबे में दबने की सूचना है। दर्जनों संपर्क मार्ग व पुल बहने से सैकड़ों ग्रामीण अपने गांव-घरों में ही कैद हो गए हैं। पेयजल और बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त होने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। वहीं मौके पर भेजी गई आपदा प्रबंधन टीमें संपर्क मार्ग कटे होने के कारण जगह-जगह फंसी हुई हैं, जिस कारण रविवार देर शाम तक राहत व बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाया था।
उत्तरकाशी: बादल फटने से आई 'जल प्रलय', कई लोगों की मौत, सैलाब में समाए दर्जनों मकान, तस्वीरें...
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जिले के मोरी ब्लाक के आराकोट क्षेत्र में शनिवार देर रात बादल फटने के बाद माकुड़ी गांव के गदेरे में आए उफान से कई मकान जमींदोज हो गए। निकटवर्ती मौंडा गांव निवासी आशीष चौहान ने बताया कि माकुड़ी में सरोजनी देवी पत्नी उपेंद्र सिंह के साथ ही एक अन्य भवन में चतर सिंह के परिवार के चार सदस्यों के मलबे में दबने की सूचना है। संपर्क नहीं होने के कारण इन लोगों का अभी तक कुछ पता नहीं चल पा रहा है। उन्होंने बताया कि मौंडा में अव्वल सिंह, कौंर सिंह, रणवीर चौहान, मनीष चौहान, चमन सिंह चौहान, विशन सिंह, जोगेंद्र सिंह, जयपाल सिंह आदि के सेब के बागीचे तबाह होने के साथ ही मकान भी मलबे से खतरे की जद में आ गए हैं। मौंडा के निकट खक्वाड़ी, बलावट एवं झोटाड़ी गांव में भी भारी नुकसान हुआ है। चिवां गांव के आंद्री खड्ड में आए उफान से मोटर पुल के साथ ही एक ट्रक भी बह गया है।
इन गांवों से नीचे टिकोची बाजार में मलबा घुसने से यहां राजकीय इंटर कालेज भवन के साथ ही एक दर्जन से ज्यादा आवासीय एवं व्यवसायिक भवन मलबे की भेंट चढ़ गए हैं। यहां सड़क पर खड़े कई वाहन भी उफान में बह गए। ग्रामीणों ने पहाड़ी की ओर भाग कर अपनी जान बचाई, लेकिन कुछ लोगों के बाढ़ में बहने या मलबे में दबने की आशंका जताई जा रही है। आराकोट खड्ड में आए उफान से पाबर नदी का प्रवाह अवरुद्ध होने पर नदी का पानी आराकोट बाजार में घुस गया। यहां एक भवन में रह रहे राइंका आराकोट में प्रवक्ता बृजेंद्र कुमार (57), उनकी बेटी संगीता (25) और बेसिक स्कूल डगोली में तैनात शिक्षामित्र मोहन लाल की पत्नी सोमा देवी (38) मलबे में दब गईं। इनमें सोमा देवी का शव बरामद हो गया है।
आराकोट में ही एक अन्य व्यक्ति का शव बरामद हुआ है। इसकी पहचान नेपाल मूल के कालूराम के रूप में हुई है। यहां पाबर नदी में उफान से ईशाली गांव को जोड़ने वाला झूला पुल भी खतरे की जद में है। डगोली गांव निवासी सियाराम नौटियाल ने बताया कि डगोली गांव खतरे की जद में आने से ग्रामीण पहाड़ी पर शरण लिए हुए हैं। क्षेत्र में अतिवृष्टि से गाड़ गदेरों में भारी उफान आने से क्षेत्र में पाबर और टौंस नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इस स्थिति को देखते हुए देहरादून प्रशासन ने त्यूणी बाजार का नदी की ओर वाला हिस्सा खाली करा दिया है।
क्षेत्र के माकुड़ी, चिवां, मौंडा, बलावट, खक्वाड़ी, टिकोची, आराकोट, डगोली, गोकुल, दुचाणू, मैंजणी, जागटा आदि गांवों को आने-जाने वाले संपर्क मार्ग भी नहीं बचे, जिससे सैकड़ों ग्रामीण अपने गांव में ही कैद होकर रह गए हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें इन गांवों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी हुई है।