फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Merry Christmas 2021: मदद ही है जिनका मकसद, मिलिए देहरादून के ऐसे सेंटा क्लॉज से...

Sat, 25 Dec 2021 03:07 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 25 Dec 2021 03:07 PM IST
विज्ञापन
christmas 2021: meet Santa Claus of Dehradun, who help needed
- फोटो : अमर उजाला

समाज में जरूरतमंदों के चेहरों पर मुस्कान लाना ही सेंटा क्लॉज का मकसद था। सेंटा क्लॉज लोगों की मदद इस तरह करते थे, कि उन्हें पता भी न चले। समाज के दुखी, वंचित और जरूरतमंद लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाना ही सेंटा क्लॉज का असल मकसद था। सेंटा  की इसी सोच के कुछ लोग अपने शहर में भी है। जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों, वंचितों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की सेवा में वर्षों से जुटे हैं। ऐसे लोगों के लिए और इस शहर के लिए ये लोग भी सेंटा क्लॉज से कम नहीं।



किसी ने मुश्किल घड़ी में मदद पहुंचाकर जिंदगी बचाई तो किसी ने चेहरे पर मुस्कान लाकर हौसला दिया। सेवा कार्य के दौरान शहर के इन सेंटा क्लॉज के सामने भी कई बाधाएं आई, लेकिन ये पीछे नहीं हटे। और आज भी समाज की सेवा उसी तन्यमता से कर रहे हैं। और लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला रहे हैं। आइये आपको शहर के इन सेंटा क्लॉज से मिलाते हैं। 

क्रिसमस 2021: उत्तराखंड के गिरिजाघरों में हुई विशेष प्रार्थना, हरिद्वार में कोरोना के चलते बंद रहा चर्च

मोहित सेठी की मदद ने कई जरूरतमंदों को नई जिंदगी दी है। वह अब तक बीस बार रक्तदान कर चुक है। दिक्कत के कारण जब वे कई बार रक्तदान नहीं कर पाए तो उन्होंने दो हजार लोगों को एक ऐसा ग्रुप बनाया जो जरूरत पड़ने पर कभी भी कही भी लोगों को ब्लड देने पहुंच जाए। इसमें हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून सहित कई जगह के लोग शामिल हैं। पिछले पांच साल से मोहित की इस पहल के कारण केवल दून ही नहीं बल्कि अन्य जिलों में भी जरूरतमदों को ब्लड मिल पा रहा है।

मरीज को ब्लड की जरूरत पड़ी तो बिना देरी किए हरीश गुलाटी दौड़े चले आए। वह कहते हैं कि यह एक ऐसा क्षण होता है जब जरा सी देरी इंसान की जिंदगी छीन सकती है। इसलिए रक्तदान बड़ा पुण्य होता है। अपने साथ ही उन्होंने अपने दोनों बेटों को भी बिना देरी किए ऐसे लोगों की मदद करने का पाठ सिखाया। वह खुद तो कई बार रक्तदान कर चुके हैं, लेकिन उनके बेटे रक्षित और एकांश भी कई बार रक्तदान कर मरीजों को नई जिंदगी दे चुके हैं।
 

christmas 2021: meet Santa Claus of Dehradun, who help needed
- फोटो : अमर उजाला

पिछले पांच साल से रोजी कौर आश्रम के हर बच्चे के जन्मदिन पर खुद अपने हाथों से केक बनाकर भेजती हैं। आश्रम के नाम का जिक्र न करने पर रोजी ने बताया कि वह नहीं चाहती कि किसी को इस बारे में पता चला। बच्चों के चेहरे की मुस्कान रोजी को भी सुकून पहुंचाती है। बतौर रोजी हम जानते हैं कि केक देखकर बच्चों को कितनी खुशी मिलती। तो उन बच्चों को भी वो भी खुशी महसूस करने का हक है। केक पहुंचते ही उन बच्चों की आंखों की चमक मुझे भावुक कर देती है। 

christmas 2021: meet Santa Claus of Dehradun, who help needed
- फोटो : अमर उजाला

वीना गुप्ता अपने घर खर्च के पैसों से बचत कर अनाथ बच्चों के लिए खाना और कपड़े भिजवाती हैं। वह पिछले 14 वर्षों  से आश्रमों में जाकर बच्चों के लिए जरूरी सामग्री भेजती है। इन दिनों वह बच्चों के लिए गर्म कपड़े भेज रही है। बच्चों को हर साल कॉपी किताबें भी वह पहुंचाती है। वीना कहती हैं कि हमारे शहर में बहुत से जरूरतमंद है। मेरा प्रयास रहता है कि अधिक से अधिक लोगों तक मैं मदद पहुंचा पाऊं। और यह मदद वह बिना किसी को बताए पहुंचाती हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
christmas 2021: meet Santa Claus of Dehradun, who help needed
- फोटो : अमर उजाला
जब परिजनों के लिए अस्पताल में खाना ले जाने की अनुमति नहीं थी, तब सिंधु गुप्ता ने ढाई महीने तक तीनों टाइम का खाना अस्पताल पहुंचाया।  मरीजों के लिए जिस भी तरह की मदद की जरूरत होती, सिंधु पूरी तरह जुटी रही। बिना कुछ जताए, सिंधु मरीजों और उनके तीमरादारों के लिए उस वक्त बड़ी मददगार बनी। अभी भी वह जरूरतमंदों तक खाना पहुंचा रही हैं। 
 

 

विज्ञापन
christmas 2021: meet Santa Claus of Dehradun, who help needed
- फोटो : अमर उजाला

सड़क पर बच्चों को भीख मांगता देख गौरव जैन का दिल पसीज गया। दो बच्चे उनके पास भीख मांगने आए थे। गौरव ने उनके स्कूल जाने के लिए कहा। बच्चों ने बताया कि वह स्कूल नहीं जा सकते। क्योंकि स्कूल जाने के लिए उनके पास पैसे नहीं है। गौरव ने दोनों बच्चों को समझाया और उन्हें गोद ले लिया। पहचान जाहिर न होने की शर्त पर गौरव जैन ने बताया कि छह साल पहले उन्होंने दोनों बच्चों को गोद लिया था। और अब दोनों बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed