भोर होते ही सूर्य देव की सुनहरी किरणें घाट पर पड़ी तो छठी मइया के लोकगीतों से घाट गूंज उठे। घाटों पर व्रतियों ने सूर्य देव को अर्घ्य दिया।
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chhath puja in Uttarakhand
- फोटो : AmarUjala
देहरादून टपकेश्वर स्थित तमसा नदी, रिस्पना के स्त्रोत, मालदेवता-कुमाल्डा में सौंग व बांदल नदियों के किनारे अर्घ्य दिया गया। अर्घ्य देने के लिए पोखरों-तालाबों-नहरों के किनारे भी श्रद्धालु एकत्र हुए और वैदिक रीति से सूर्य पूजन किया।
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घाटों पर चारों ओर सजी-धजी महिलाएं छठी मइया के गीत गाते हुए सूर्य के उदय होने का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं।
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जैसे-जैसे सूर्य की किरणों ने धरती को स्पर्श किया, वैसे ही व्रती महिलाएं भरी कोसी और सूप-सुपली के साथ बावड़ी में कमर तक पानी में उतर गईं। उन्होंने सूर्य को अर्घ्य देकर पुत्र प्राप्ति और पति की दीर्घायु के साथ ही सुख-समृद्धि की कामना की।
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इसी के साथ महिलाओं ने छठ व्रत का पारण किया। उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए महिलाएं तड़के भोर में ही धुंध के बीच गर्म कपड़ों के साथ घाटों पर पहुंची।