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छठ पूजा 2019: नहाय खाय के साथ शुरू होगा महापर्व, सूर्य को अर्घ्य देते समय इस बात का जरूर रखें ध्यान

Thu, 31 Oct 2019 08:49 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 31 Oct 2019 08:49 AM IST
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Chhath puja 2019 start Today must remind this thing during surya puja
chhath - फोटो : अमर उजाला

सूर्य की उपासना का महापर्व छठ (सूर्यषष्ठी) व्रत नहाय खाय के साथ आज से शुरू हो गया है। सूर्य उपासना के तीन दिवसीय महाव्रत को लेकर लोगों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। पहले दिन शुद्धता और पवित्रता के साथ व्रत का संकल्प लिया जाएगा। दूसरे दिन (पंचमी खरना) कुलदेवता की पूजा होगी। 

Chhath puja 2019 start Today must remind this thing during surya puja
- फोटो : amar ujala

कार्तिक शुक्लपक्ष षष्ठी पर जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। सूर्य को अर्घ्य देने के समय इस एक बात का ध्यान व्रतियों को जरूर रखना चाहिए। मान्यताओं के मुताबिक छठ महापर्व के दौरान पीतल से बने पात्र से ही अर्घ्य देना चाहिए। तांबे के पात्र से दूध का अर्घ्य नहीं देना चाहिए। वहीं, चांदी, स्टील, शीशा, और प्लास्टिक के पात्र वर्जित माने जाते हैं।

Chhath puja 2019 start Today must remind this thing during surya puja

सूर्यदेव की पूजा के लिए बुधवार सुबह से देर रात तक घर और घाटों पर तैयारियां होती रहीं। प्रसाद व पूजा की सामग्री, सूप, डाला आदि की खरीदारी के लिए बाजारों में महिलाओं की काफी भीड़ रही। छह पर्व में शुद्धता का विशेष महत्व होता है। भगवान सूर्य की पूजा का प्रसाद बनाने के लिए चूल्हे की लकड़ी से लेकर बर्तन तक सभी को गंगाजल से पवित्र किया जाता है।

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Chhath puja 2019 start Today must remind this thing during surya puja

पूजन सामग्री बनाने के लिए फूल और पीतल के बर्तन उपयोग में लाए जाते हैं। व्रत करने से पहले घर-आंगन और व्रती का पवित्र होना जरूरी है। इसके लिए तीन दिनी व्रत के पहले दिन नहाय-खाय के दौरान गंगा स्नान कर व्रती महिलाएं व पुरुष स्वयं को पवित्र करते हैं। गंगाजल से पूरे घर को पवित्र किया जाता है। व्रत का पकवान गंगाजल से ही बनता है। दिनभर व्रत करने के बाद शाम को लौकी की सब्जी, अरहर की दाल, रोटी या चावल खाया जाता है।

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दूसरे दिन पंचमी को व्रती एक समय बिना नमक का भोजन करते हैं। षष्ठी को निर्जला व्रत रह कर गंगा, यमुना जैसी नदियों या फिर सरोवर में कमर तक पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सप्तमी की सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देकर व्रत का पारण होता है। सूर्य षष्ठी व्रत की मुख्य शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना से मानी जाती है।

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