राहु एवं केतु का 18 वर्ष बाद होने वाला राशि परिवर्तन पूरे विश्व को प्रभावित कर सकता है। 17 अगस्त को यह दोनों ग्रह राशि बदल रहे हैं। इसके बाद राहु का कर्क और केतु का मकर राशि पर प्रवेश होगा। जिसे ज्योतिष अच्छा नहीं मान रहे हैं। सभी राशियों पर इसका अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा।
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18 साल बाद राहु-केतु का राशि परिवर्तन बढ़ाएगा आपकी मुश्किलें, पड़ेगा अलग-अलग प्रभाव
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 10 Aug 2017 09:15 AM IST
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राहु
- फोटो : rahu
राहु-केतु 18 माह में राशि बदलते हैं। इसके अनुसार एक राशि में वह 18 वर्ष बाद पहुंचते हैं। अब 17 अगस्त को राहु कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इससे पूर्व 11 जनवरी वर्ष 1999 में कर्क राशि पर राहु का प्रवेश हुआ था।
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उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। जो कि राहु की शत्रु राशि है। शत्रु राशि पर राहु का प्रवेश अच्छा नहीं माना जा रहा है। वहीं केतु का मकर राशि पर प्रवेश होगा। इन दोनों ग्रहों का इन राशियों पर संचार छह मार्च वर्ष 2019 तक रहेगा।
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- फोटो : google
डा. आचार्य सुशांत राज के अनुसार जिन भावों में यह ग्रह होते हैं, उन भावों को प्रभावित करते हैं। राहु का चंद्रमा की राशि और केतु का शनि की राशि पर संचरण होगा। 18 माह के गोचर काल में यह ग्रह मिश्रित परिणाम देंगे। राहु भौतिक लाभ, विदेश भ्रमण, सुख लाभ, अहंकार आदि का प्रतीक है। केतु अलगाव, आध्यात्मिक झुकाव आदि होना दर्शाता है।
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ग्रह नक्षत्र
ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य के अनुसार राहु कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा का शत्रु है इसलिए कई बार चंद्रमा और राहु की युति में मानसिक विकारों का सामना करना पड़ता है। विश्व की राजनीति व अन्य गतिविधियों में अप्रत्याशित परिवर्तन हो सकता है। भारत सहित कई देशों में प्राकृतिक आपदा आने का योग है। भारत की कुंडली में राहु तीसरे घर में गोचर करने वाला है। विभिन्न राशियों के लिए अलग-अलग प्रभाव इन ग्रहों पर पड़ेगा।