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Chandrayaan-2: भारत के 'मून मिशन' में नैनीताल के ‘चंद्र’ का बड़ा हाथ, मंगल मिशन में भी थे साथ
Tue, 23 Jul 2019 10:27 AM IST
अलका त्यागी
डॉ. गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल
डॉ. गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 23 Jul 2019 10:27 AM IST
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वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चंद्रमोहन किश्तवाल
- फोटो : अमर उजाला
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चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए इसरो की ओर से लॉन्च किए गए चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण में नैनीताल के 'चंद्र' का भी बड़ा योगदान रहा।नगर में पले बढ़े और यहां से शिक्षा ग्रहण करने वाले इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चंद्रमोहन किश्तवाल की चंद्रयान-2 की लांचिंग में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डॉ. किश्तवाल वर्ष 2014 के सफल मंगल मिशन में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं।
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वह इस समय इसरो के अहमदाबाद स्थित एटमोस्फियरिक ओसियन सेंटर में ग्रुप निदेशक हैं। डॉ. किश्तवाल की बहन सुनीता घिल्डियाल नैनीताल में सेंट जोसेफ कॉलेज में पढ़ाती हैं। बहनोई अनिल घिल्डियाल जाने-माने रंगकर्मी हैं। मूलरूप से सल्ट अल्मोड़ा निवासी उनके पिता सीताराम किश्तवाल यहां कोऑपरेटिव में कार्यरत रहे। डॉ. किश्तवाल की प्रारंभिक शिक्षा भारतीय शहीद सैनिक स्कूल में हुई।
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उन्होंने कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर से बीएससी और यहीं से 1982 में प्रथम श्रेणी में फिजिक्स में एमएससी की। पढ़ाई में वे शुरू से ही अव्वल रहे। इसके बाद आईआईटी दिल्ली से उन्होंने एस्ट्रोफिजिक्स में पीएचडी की। वह इसरो के अहमदाबाद केंद्र में बतौर वैज्ञानिक कार्यरत रहे।
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डॉ. किश्तवाल तीन वर्ष तक अमेरिका और जापान में भी कार्यरत रहे। देश के प्रति प्रेम व देश के लिए कुछ करने के जज्बे के चलते वह 25 साल पहले एक करोड़ रुपए प्रतिवर्ष का ऑफर ठुकराकर भारत लौट आए। एटमोस्फियरिक विज्ञान सहित साइक्लोनिक विज्ञान में विशेषज्ञता रखने वाले डॉ. किश्तवाल शुरू से ही मून मिशन से जुड़े रहे।
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चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण पर एरीज के निदेशक डॉ. वहाबुद्दीन, पूर्व निदेशक अनिल पांडे सहित तमाम वैज्ञानिकों ने इसरो को बधाई दी है। उनका कहना है कि इस अत्यंत जटिल मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर मिसाल कायम की है जो अंतरिक्ष में भारत को विश्व में अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर देगा।
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