चमोली में नमामि गंगे परियोजना के तहत बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का डिजाइन तो ठीक है लेकिन इसके प्रबंधन में चूक की वजह से हादसा हुआ है। अमर उजाला से बातचीत में सचिव पेयजल अरविंद सिंह ह्यांकी ने गत दिनों हुए हादसे के कारणों पर प्रकाश डाला। वह दो दिन से प्लांट का निरीक्षण कर रहे हैं।
Chamoli Accident: संचालन, रख-रखाव और प्रबंधन में लापरवाही से हुआ करंट हादसा, 16 लोगोंं की छिन गई जिंदगी
जल संस्थान
- प्लांट का संचालन करने के साथ रखरखाव कराने की जिम्मेदारी नहीं निभाई।
- जिम्मेदार अधिकारी हादसे में पहली मौत के बावजूद चुप्पी साधे रखी।
- हादसे की तत्काल सूचना यूपीसीएल को भी नहीं दी गई।
कंपनी
- शॉर्ट सर्किट, पैनल फुंकने, केयर टेकर मौत की जानकारी के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं।
- सुपरवाइजर से सूचना मिलने के बावजूद अधिकारियों ने गंभीर नहीं बरती।
- समय से पैनल ठीक कराया जाता तो बच सकती थीं इतनी जानें।
यूपीसीएल
- बिजलीकर्मी ने जंपर जोड़ा लेकिन इसके उड़ने का कारण तलाशने की जरूरत नहीं समझी।
- प्लांट के भीतर विद्युत सुरक्षा उपायों की अनदेखी की गई।
नमामि गंगे अभियान में उत्तराखंड में तकनीकी संस्था के तौर पर आईआईटी रुड़की अपनी सेवाएं दे रहा है। सचिव पेयजल अरविंद सिंह ह्यांकी ने कहा कि प्लांट के डिजाइन, इसकी चारों ओर के टिनशेड की बाउंड्री में कोई परेशानी नहीं है। यह प्लांट आईआईटी रुड़की से अप्रूव्ड है। प्लांट के टिनशेड को लेकर सवाल बेवजह हैं।
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प्लांट निर्माता कंपनी ने 2021 में इसे तैयार कर दिया था। उसके बाद संचालन के लिए इसे जल संस्थान के हवाले कर दिया गया था। जिस कॉन्फिडेंट इंजीनियरिंग कंपनी ने इसका निर्माण किया है, उसे कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक 10 साल तक इसका रखरखाव करना था। कंपनी से रखरखाव करवाने की जिम्मेदारी जल संस्थान की थी।