अगर आप होली पर बेहद चटक लाल, हरे, काले, पीले रंगों से होली खेलने की चाहत में है तो जरा संभलकर ! चटक रंग आंखों की रोशनी छीन सकते हैं। यही नहीं कैंसर, एक्जिमा, इरिटेंट कान्टैक्ट इर्मीटाइटिस (आइसीडी) एलर्जिक कांटैक्स डर्मीटाइटिस (एसीडी) जैसी गंभीर बीमारियों को भी न्योता दे सकते हैं।
नेत्र एवं त्वचा रोग विशेषज्ञों की मानें तो चटक रंगों में मौजूद जस्ता, जिंक, शीशा, अभ्रक, सिलिका, पोटैशियम, क्रोमियम एवं आर्सेनिक जैसे खतरनाक रासायनिक तत्व सेहत के लिहाज से बेहद खतरनाक हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञों के मुताबिक पहला प्रभाव इरीटेंट कान्टेक्ट डर्मीटाइटिस (आइसीडी ) होली खेलने के तुरंत बाद दिखाई देता है।
इसमें खुजली, आंखों में जलन और शरीर पर फफोले पड़ जाते हैं। जबकि दूसरा एलर्जिक कान्टैक्ट डर्मीटाइटिस (एसीडी) के रूप में दिखाई देता है। होली खेलने के दौरान खतरनाक रंग नाक, मुंह या आंखों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाए तो सांस लेने में दिक्कत, चमड़ी का मोटा हो जाना और बेहद गंभीर परिस्थितियों में कैंसर तक का भी खतरा होता है। ऐसे में बेहतर है कि होली के दौरान इन रंगों से परहेज पर हर्बल रंगों या गुलाल से होली खेली जाए।
वरिष्ठ नेत्ररोग विशेषज्ञ डा. दिनेश सिंह के मुताबिक होली के दौरान खतरनाक रंगों से आंखों का बचाना बेहद जरूरी है। रंगों के आंखों में पड़ने से तत्काल सफाई न की गई तो कभी- कभार आंखों की रोशनी जाने का खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे में बेहतर यही है कि खतरनाक रंगों से आंखों को बचाया जाए। यदि रंग आंख में पड़ जाए तो तत्काल इसकी सफाई करके कोई आई लुब्रीकेंट डाल लें।
होली के दौरान खतरनाक रंगों से बचें। यदि रंग आंखों में चले जाए तो तत्काल आंखों में पानी के छींटे मारकर साफ करें। होली खेलने से पहले हाथ और चेहरे पर नारियल, सरसों का तेल या कोई जैली लगा लें।