जरा सी उंगली जल जाए तो हर कोई तड़प जाता है। लेकिन सालियर गांव में आग की चपेट में आए भाई-बहन आग की लपटों के बीच थे। आग उनको जला रही थी लेकिन आग से बचने में वे बेबस नजर आए। मानों उन्होंने स्वयं को आग के हवाले कर दिया हो।
वहीं उपचार के लिए दिल्ली ले जाते समय दोनों की मौत हो गई है। भाई-बहन की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि आग लगाने के लिए थिनर और केरोसिन का इस्तेमाल किया गया है। पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।
हादसे का शिकार हुए दिलशाना, उसका बेटा सनव्वर (21 वर्ष), बेटी रुखसार बानो (19 वर्ष), शहनुमा (22 वर्ष) घर के आंगन में चार अलग-अलग चारपाई पर सोए हुए थे, जबकि बड़ी बेटी खुशनुमा अपने दो साल के बेटे मोहनीस और छोटी बहन महकारा(10 वर्ष) के साथ अंदर कमरे में सोई हुई थी।
दिलशाना ने बताया कि सुबह करीब पौने चार बजे आंख खुली तो वह उठकर अंदर चली गई। उसके अंदर जाने के 10-15 मिनट बाद ही अचानक बाहर आग ही आग नजर आई। जिसे देखकर वह घबरा गई। उसने शोर मचाया। शोर सुनकर आस पड़ोस के लोग वहां आ गए। लोगों ने आग बुझाने के लिए पानी डाला तो आग बुझने के बजाए और भड़क गई।
इस पर लोगों ने कंबल और खेस आदि भिगोकर सनव्वर एवं रुखसार की आग को बुझाया, हालांकि आग लगने पर शहनुमा की आंख खुल गई थी और वह तुरंत ही शोर मचाते हुए बाहर घेर में अपने दादा के पास आ गई थी। जिससे वह बच गई । आग से चारों चारपाई और बिस्तर जलकर राख हो गए।