गीता टॉवर कॉम्प्लेक्स में हुआ विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि दूर-दूर तक पूरा इलाका दहल गया। आसपास रहने वाले परिवार तो दहशत में आ गए। चीख-पुकार के बीच उन्हें बच्चों के साथ घरों से बाहर निकलने की राह ही सूझी। बाहर भी घनघोर अंधेरा ही था। उस वक्त सुबह के 4.35 बज रहे थे। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि हुआ क्या है।
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कांप्लेक्स में धमाका
- फोटो : अमर उजाला
घटनास्थल से दूर आईटीबीपी का रीजनल सेक्टर भी है। ऐसे में विस्फोट को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ गई। घटनास्थल पर आए अधिकांश लोग यह मानने को तैयार नहीं थे कि कॉम्प्लेक्स का धमाका साधारण था। पड़ोसी नंदिनी का कहना था कि धमाके से उनका पूरा मकान हिल गया था। खिड़कियों के शीशे टूटने के साथ शटर के टुकड़े दीवारों से टकराए। उस समय हम नींद में थे। धमाका सुनकर झटके से आंखें खुलीं तो बिजली गायब थी।
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कांप्लेक्स में धमाका
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अंधेरा होने के कारण माहौल खौफजदा हो गया। छोटे बच्चे तो चीखने-चिल्लाने लगे थे। परिवार के सदस्यों को वे बाहर लेकर आए तो कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट में आग देखकर उनका खौफ थोड़ा कम हुआ। गगन सियाल के परिजनों ने बताया कि विस्फोट में उनके मकान के शीशे भी टूट गए। पहले तो समझ नहीं पाए थे कि आखिर क्या हुआ। बाहर आकर कॉम्प्लेक्स में धमाके का पता चला। होटल व्यावसायी रसिक भाटिया का कहना था कि विस्फोट कैसे हुआ, यह तो पुलिस अधिकारी जांच के बाद ही बता पाएंगे।
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कांप्लेक्स में धमाका
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लेकिन, धमाके की आवाज से काफी दूर तक रहने वाले लोग सहम गए है। सीमेंट कारोबारी अभिषेक कालरा ने बताया कि कॉम्प्लेक्स की पहली मंजिल पर उनके ऑफिस में काफी नुकसान हुआ है। पड़ोसी आशुतोष गोयल ने बताया कि धमाके में काफी मकानों को नुकसान पहुंचा है।
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कांप्लेक्स में धमाका
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वरुण की दीवार भी क्षतिग्रस्त हुई है। गीता टॉवर कॉम्प्लेक्स में विस्फोट दिन के समय में होता तो बड़ी जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता है। बसंत विहार का यह इलाका बेहद भीड़भाड़ वाला है। खासतौर से शाम के समय यहां बरगर, चिकन और फास्ट फूड खाने वालों का जमावड़ा रहता है।