आधार को 'आधार' बनाकर करोड़ों के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई।
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बड़ा खुलासाः आधार को 'आधार' बनाकर यहां दे दिया करोड़ों के फर्जीवाड़े को अंजाम
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 11 Sep 2017 08:57 AM IST
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आधार कार्ड
- फोटो : Getty Images
पुनर्वास के नाम पर मिलने वाली करोड़ों की जमीन के लिए राजाजी राष्ट्रीय पार्क टाइगर रिजर्व के कई वन गुर्जरों के बगैर किसी आधार के आधार कार्ड बना दिए गए हैं। विभाग की शुरुआती जांच में इस तरह के 30 आधार कार्ड पकड़ में आए हैं, जिसमें नाबालिग को बालिग दर्शाया गया है। वहीं, एक ही व्यक्ति का अलग-अलग नामों से आधार कार्ड बनवाकर भी खेल किया गया है। इससे आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसी और पार्क प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आधार कार्ड बनवाने के लिए लगी महिलाओं की लंबी लाइन
- फोटो : Reuters
राजाजी राष्ट्रीय पार्क से वन गुर्जरों को विस्थापित कर उनके पुनर्वास के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है। कई वन गुर्जरों के गलत तथ्यों के आधार पर आधार कार्ड बना दिए गए हैं। अधिकतर आधार कार्ड में वन गुर्जरों की जन्मतिथि एक जनवरी दर्शाई गई है। जबकि, एक ही व्यक्ति के अलग-अलग नाम से दो या इससे अधिक आधार बने हैं।
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विभागीय सूत्रों का कहना है कि पुनर्वास के नाम पर मिलने वाली करोड़ों की कीमत की 8200 वर्ग मीटर जमीन के लिए नाबालिग वन गुर्जरों को भी बालिग दर्शाया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामला पकड़ में आने के बाद सभी वन गुर्जरों के आधार कार्ड की जांच की जा रही है।
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rajaji national park
राजाजी राष्ट्रीय पार्क में हर बालिग विवाहित जोड़े और उनके विवाहित बच्चों को मिलाकर एक परिवार माने जाने का शासनादेश जारी हुआ था। तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. रणवीर सिंह की ओर से 12 मई 2015 को जारी आदेश में कहा गया कि विधुर और विधवा को भी एक परिवार माना जाए। आदेश में कहा गया कि परिवार के निर्धारण के लिए कट ऑफ डेट 31 मार्च 1998 मान्य होगी। इस आदेश के बाद गलत तथ्यों के आधार पर कई आधार कार्ड बना दिए गए।