नोटबंदी के महज पांच दिन के भीतर उत्तराखंड के सहकारी बैंकों में जमा हुई रकम से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भी हैरान है।
इन पांच दिनों में सहकारी बैंकों में 235 करोड़ रुपये कैसे जमा हो गए? आरबीआई ने सहकारी बैंकों के नीति नियंताओं से इस बाबत जवाब मांगा तो कहा गया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के करेंसी चेस्ट ने यह पैसा जमा करने से मना कर दिया था।
इस वजह से यह रकम सहकारी बैंकों के पास ही रखी है। यह भी दावा किया गया कि बड़ी राशि बैंक के खाताधारकों के अलावा आए अन्य लोगों ने भी बदली है। इस तर्क से असंतुष्ट रिजर्व बैंक ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
बीती आठ नवंबर की रात बारह बजे से हजार और पांच सौ के नोटों के प्रचलन पर रोक लगा दी गई थी। इसके अगले दिन बैंकों को बंद रखा गया।
10 नवंबर से एक निर्धारित सीमा तक पुराने नोट बदलने और खातों में जमा करने का सिलसिला सभी बैंकों में एक साथ शुरू हुआ। इसी क्रम में कोऑपरेटिव (सहकारी) बैंकों में भी पैसा जमा होना शुरू हुआ, मगर देश भर से तमाम शिकायतें आने के बाद आरबीआई ने 14 नवंबर को एक आदेश जारी करके सहकारी बैकों में नोट बदलने या जमा करने पर रोक लगा दी।