उत्तराखंड में भिक्षावृत्ति पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अब सार्वजनिक स्थलों पर भीख मांगते पकड़े जाने पर यह अपराध की श्रेणी में होगा और इसमें बगैर वारंट के गिरफ्तारी हो सकेगी। अधिनियम में अपराध साबित होने पर जुर्माने के साथ एक से तीन साल की सजा का प्रावधान है।
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begging ban in uttarakhand
दूसरी बार अपराध सिद्ध होने पर सजा की अवधि पांच साल तक हो सकती है। निजी स्थलों पर भिक्षावृत्ति की लिखित और मौखिक शिकायत पर अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई होगी। सार्वजनिक स्थलों पर भीख देने को भी अपराध की श्रेणी में माना गया है। इस तरह भीख देना और लेना दोनों अपराध श्रेणी में होंगे। समाज कल्याण विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार ने उत्तरप्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम 1975 की धाराओं में संशोधन किया है।
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किशोर न्याय अधिनियम की तहत अभी तक 14 साल तक के बच्चों से भिक्षावृत्ति को संज्ञेय अपराध माना गया था और इस पर पूरी तरह से रोक थी। मगर अब सभी उम्र के लोगों पर सार्वजनिक स्थलों में भीख मांगने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
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प्रदेश सरकार ने यह कदम नैनीताल उच्च न्यायालय के उस फैसले के मद्देनजर लिया है, जिसमें कोर्ट ने प्रदेश के 19 स्थलों में भिक्षावृत्ति पर पूर्ण पाबंदी लगाने के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार ने शासनादेश के जरिये भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध लगा दिया था।
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मगर कोर्ट ने राज्य सरकार को अधिनियम में संशोधन को शामिल करने के निर्देश दिए। कोर्ट के आदेश पर सरकार ने अब अमल करते हुए अधिनियम में प्रावधान कर दिया है। निजी स्थलों के भीतर भीख देना तब तक अपराध की श्रेणी में नहीं होगा, जब तक कि इस मामले में कोई मौखिक या लिखित शिकायत नहीं होती।