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स्लीपिंग डिसऑर्डर भालुओं को बना रहा इंसानों का 'जानी दुश्मन'

Mon, 03 Oct 2016 09:06 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 03 Oct 2016 09:06 PM IST
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bear become dangerous for humans
Bear

उत्तराखंड में भालू-मानव संघर्ष बढ़ सकता है। वन विभाग के एक सर्वेक्षण में यह आशंका सामने आई है। सर्वेक्षण के निष्कर्षों के मुताबिक ठंड के दिनों में करीब छह महीने तक उड्यार (गुफा) में गहरी नींद सोने वाले भालू ने ‘शीत निष्क्रियता’ (हाइबरनेशन) में जाना छोड़ दिया है।


 

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Bear

इस बदलाव से उसके स्वभाव में आक्रामकता बढ़ गई है। वन अधिकारियों का मानना है कि इसी आक्रामकता के चलते पिछले कुछ सालों में भालुओं द्वारा मानवों पर हमले की घटनाओं में इजाफा दर्ज किया गया है। विभाग के वन्य जीव प्राणि विशेषज्ञ इसे ग्लोबल वॉर्मिंग से आ रहे हिमालयी क्षेत्र के ‘इको सिस्टम’ में बदलाव का नतीजा मान रहे हैं।
 

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bear

सर्वेक्षण के मुताबिक वन विभाग ने गंगोत्री, उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर, पौड़ी, पिथौरागढ़ आदि जिलों में ढाई सौ काले और भूरे भालुओं के मिजाज का अध्ययन किया था। हिमालयी क्षेत्र के भूरे और काले भालू के मिजाज में यह बदलाव चार-पांच सालों में देखा गया है। भालू के जीवन शैली में आई इस तब्दीली ने वन विभाग को चिंतित कर दिया है। प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक उत्तराखंड दिग्विजय सिंह खाती का कहना है कि भालू के पूरे साल जगने से मनुष्य और भालू के बीच टकराहट का अंदेशा पैदा हो गया है।
 

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himalayan bear seen in nainital - फोटो : amar ujala

उन्होंने बताया कि ठंड के दिनों में जब हिमालयी क्षेत्र में बर्फ गिरती है, भालू छह महीने के लिए हाइबरनेशन में चले जाते थे। उस दौरान वे कुछ खाते नहीं थे। जब हाइबरनेशन का समय खत्म होता था तो बाहर आते थे। अब वे ठंड के उन दिनों में भी जग रहे हैं जब वे सोते थे। इस दौरान उन्हें वे वनस्पतियां और फल नहीं मिल पाते जिन्हें वे खाते हैं। कुछ वनस्पतियां खास मौसम में ही पैदा होती है। ऐसी स्थिति में भालुओं की ‘फूड हैबिट’ बदल रही है।
 

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भालू का हमला - फोटो : AmarUjala

एक तो उन्हें अधिक खाना पड़ रहा है और ऐसी चीजें भी खा रहे जिन्हें वे पहले खाते नहीं थे। अध्ययन में पाया गया कि भालू को गुस्सा अधिक आने लगा है। साथ ही भालू के जंगल छोड़कर मानवों के रहने के स्थानों पर बार-बार अतिक्रमण की घटनाएं भी बढ़ गई हैं।
 

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