सोचिए कैसा हो, जब आप ऑफिस पहुंचे और आपसे पहले ही सैकड़ों लोग आपके इंतजार में लाइन में लगे हों। आपको भूख लगे, लंच का टाइम हो और आप जनता की परेशानी की वजह से नोट बांटने में लगे हों।
चार दिन से खाना-पीना छोड़कर काम में लगे बैंक अधिकारी और कर्मचारी
इस समय ऐसे ही अनुभव से रूबरू हो रहे हैं बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी। चार दिनों से खाना-पीना व आराम छोड़कर बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी काम में लगे हैं। कई बैंकों में तो ब्रांच मैनेजर भी अपना केबिन छोड़कर कर्मचारियों के साथ बैठकर नोट एक्सचेंज कराते देखे गए। ऐसे ही कुछ बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पहली बार इतनी बड़ी संख्या में छुट्टी के दिन लोगों की सेवा करने का मौका मिला। उन्होंने इसे एक अच्छा अनुभव करार दिया।
खास बात यह है कि भले ही जनता के लिए बैंक शाम को छह या सात बजे बंद हो रहे हों, लेकिन दिनभर जो नोट बांटे गए, खातों में जमा किए गए उनका रिकॉर्ड तैयार करने में अधिकारियों और कर्मचारियों को रात के 12 बज रहे हैं।
बात जब ड्यूटी की हो, जनता की परेशानी की हो तो हमारे लिए यह कतई मायने नहीं रखता कि छुट्टी का दिन है या ड्यूटी का। लिहाजा हमने अपनी पूरी टीम को भी जनता की परेशानी को लेकर एकजुट किया और चार दिन से सभी 15 से 20 घंटे तक काम कर रहे हैं।
- संतोष कुमार, चीफ मैनेजर पीएनबी
लोगों के नोट चल नहीं रहे हैं तो बैंक ही एकमात्र ऐसी जगह है जहां से नोट बदले जा सकते हैं। इस नाते हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। लिहाजा हम सभी चार दिन से जनता की सेवा में समर्पित हैं। यहां समय और दूसरी जरूरतों से ज्यादा जनता की परेशानी मायने रखती है।
- जेके बिष्ट, मैनेजर, डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक