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इस मंदिर में छिपा है प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के 'लुप्त' होने का रहस्य

Thu, 06 Oct 2016 03:10 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गोपेश्वर
ब्यूरो / अमर उजाला, गोपेश्वर Updated Thu, 06 Oct 2016 03:10 PM IST
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badrinath dham will disappear
badrinath dham - फोटो : amar ujala

जोशीमठ स्थित मंदिर में मौजूद नृसिंह भगवान की मूर्ति की दाहिनी भुजा के कारण बदरीनाथ धाम लुप्त हो जाएगा। 

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badrinath - फोटो : AmarUjala

प्राचीन मान्यता है कि जब आठवीं वीं शताब्दी में 12 साल की उम्र में आदि गुरु शंकराचार्य हिमालय क्षेत्र की ओर आए तो उन्होंने बदरीनाथ क्षेत्र में हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए राम कथाएं, रामलीलाएं और अन्य धार्मिक आयोजन कराए। 
 

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lord narsingh

शंकराचार्य ने लोगों को श्रृष्टि की रचना से लेकर देव उत्पत्ति के बारे में बताया। इस दौरान शंकराचार्य ने जोशीमठ में विष्णु के अवतार नृसिंह भगवान की प्रतिमा स्थापित की। जिसकी दाहिनी भुजा पतली है। जो धीरे-धीरे और अधिक पतली होती जा रही है।
 

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lord narsingh

केदारखंड के सनत कुमार संहिता में कहा गया है कि जब भगवान नृसिंह की मूर्ति से उनका हाथ टूट कर गिर जाएगा तो विष्णुप्रयाग के समीप पटमिला नामक स्थान पर स्थित जय व विजय नाम के पहाड़ आपस में मिल जाएंगे और बदरीनाथ के दर्शन नहीं हो पाएंगे।
 

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भविष्य बदरी मंदिर

तब जोशीमठ के तपोवन क्षेत्र में स्थित भविष्य बदरी मंदिर में भगवान बदरीनाथ के दर्शन होंगे। केदारखंड के सनतकुमार संहिता में भी इसका उल्लेख मिलता है। 
 

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