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बदरीनाथ धाम में आज भी पूजा के समय नहीं बजाया जाता शंख, पीछे है ये बड़ी वजह

Wed, 16 Oct 2019 04:30 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाल, रुद्रप्रयाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाल, रुद्रप्रयाग Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 16 Oct 2019 04:30 PM IST
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Badrinath Dham Conch shell Untold Story

भगवान विष्णु को शंख की ध्वनि प्रिय लगती है, लेकिन उनके धाम भू-बैकुंठ बदरीनाथ में शंख नहीं बजता है। सभी मठ-मंदिरों में देवी-देवताओं का पूजा-अर्चना के साथ शंख ध्वनि से आह्वान किया जाता है, लेकिन हिमालय की तलहटी पर विराजमान भू-बैकुंठ बदरीनाथ धाम में शंखनाद नहीं होता है। 

Badrinath Dham Conch shell Untold Story

आचार्य विशंवर प्रसाद नौटियाल और दिनेश पुरोहित ने बताया कि  इसके पीछे रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लॉक के सिल्ला गांव से जुड़ी प्राचीन मान्यता प्रचलित है। मान्यता है कि रुद्रप्रयाग के सिल्ला गांव स्थित साणेश्वर मंदिर से बातापी राक्षस भागकर बदरीनाथ में शंख में छुप गया था, इसलिए धाम में आज भी शंख नहीं बजाया जाता है।

Badrinath Dham Conch shell Untold Story

कहा जाता है कि जब हिमालय क्षेत्र में असुरों का आतंक था। तब, ऋषि-मुनि अपने आश्रमों में पूजा-अर्चना भी नहीं कर पाते थे। यही स्थिति साणेश्वर महाराज के मंदिर में भी थी। यहां जो भी ब्राह्मण पूजा-अर्चना को पहुंचते, राक्षस उन्हें अपना निवाला बना लेते। 

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तब साणेश्वर महाराज ने अपने भाई अगस्त्य ऋषि से मदद मांगी। एक दिन अगस्त्य ऋषि सिल्ला पहुंचे और साणेश्वर मंदिर में स्वयं पूजा-अर्चना करने लगे, लेकिन राक्षसों का उत्पात देखकर वह भी सहम गए। 

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उन्होंने मां भगवती का ध्यान किया तो अगस्त्य ऋषि की कोख से कुष्मांडा देवी प्रकट हो गई। देवी ने त्रिशूल और कटार से वहां मौजूद राक्षसों का वध किया। कहा जाता है कि देवी से बचने के लिए तब आतापी-बातापी नाम के दो राक्षस वहां से भाग निकले। 

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