पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की यादें टिहरी से भी जुड़ी हैं। दो बार पुरानी टिहरी आए पूर्व प्रधानमंत्री ने पृथक उत्तराखंड राज्य के लिए कोशिश करने की बात भी कही थी।
स्मृति शेष: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी यहां बनाना चाहते थे अपना घर, पीछे थी ये वजह
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वर्ष 1980 में ग्वालियर से लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह गंगोत्री यात्रा पर आए थे। गंगोत्री जाने से पहले अटल जी तब भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे सुरेशचंद जैन के घर पुरानी टिहरी में रुके थे। इस दौरान उन्हें टिहरी जिले का प्रमुख व्यापारिक केंद्र चंबा काफी पसंद आया तो उन्होंने यहां अपना आवास बनाने की इच्छा जताई थी। लेकिन उसके बाद इस बारे में उन्होंने कोई चर्चा नहीं की।
अधिवक्ता सुरेश चंद जैन ने बताया कि जब वह पठानी सूट पहनकर पुरानी टिहरी उनके घर आए थे तो सूट पहनने का कारण पूछने पर उन्होंने कहा था कि वह किसी राजकीय यात्रा पर नहीं है। उसके बाद उन्होंने धोती और कुर्ता पहन लिया था। उन्होंने बताया कि गंगोत्री में स्नान-ध्यान करने के बाद लौटते समय उन्होंने हर्षिल में कुछ दिनों तक अकेले रहने की मंशा जताई थी। तब उनके साथियों ने कहा कि गुलाब की खुशबू को रोका नहीं जा सकता, इसलिए उन्होंने यह इरादा टाल दिया।
वर्ष 1985 में वह दूसरी बार पुरानी टिहरी आए थे, उस समय यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कल्याण सिंह भी उनके साथ थे। तब लायंस क्लब में उनका स्वागत किया गया। रामलीला मैदान में उन्होंने एक जनसभा भी संबोधित की थी। सुरेश चंद जैन ने एक संस्मरण सुनाते हुए बताया कि एक बार दिल्ली अटल जी के आवास पर पर्यावरविद् सुंदरलाल बहुगुणा को उनसे मिलाया तो उन्होंने कहा था कि बहुगुणा जी से बहुत डर लगता है, वह कई दिनों तक अनशन पर बैठ जाते हैं।