हमेशा धोती, कुर्ते में नजर आने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मसूरी पहुंचते ही वेशभूषा बदल लेते थे। मसूरी में वे अक्सर पैंट-कमीज पहनकर घूमा करते थे, ताकि लोग उन्हें पहचान न सकें। प्रधानमंत्री बनने से पहले और बाद में वे कई बाद मसूरी आए।
लोग पहचान न सकें, इसलिए वेश बदलकर घूमते थे अटल बिहारी, उनकी अनकही 10 रोचक बातें...
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मसूरी से विशेष लगाव रखने वाले वाजपेयी हफ्तों तक मसूरी में प्रवास करते थे। मसूरी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएन माथुर ने बताया कि पहली बार जब उन्होंने वाजपेयी को देखा तो पहचान नहीं पाए। हमेशा धोती, कुर्ते में रहने वाले वाजपेयी मसूरी की सड़कों पर पेंट-कमीज पहनकर घूम रहे थे। उन्होंने किताबघर स्थित दुकान से कुछ दवाएं खरीदी। दुकान स्वामी स्व. अशोक कुमार ने कहा कि उनकी शक्ल अटल बिहारी वाजपेयी से मिलती-जुलती है। इस पर उन्होंने खुद बताया था कि वे अटल ही हैं।
अशोक कुमार ने आरएन माथुर को वाजपेयी के मसूरी में होने की सूचना दी। माथुर ने उन्हें लायंस क्लब के समारोह में मुख्य अतिथि बनने का न्योता दिया। निजी दौरे पर होने के कारण वाजपेयी ने मना कर दिया, लेकिन बाद में मान गए। वाजपेयी मसूरी में कैंपटी फॉल रोड स्थित एकांत भवन में कई दिनों तक ठहरकर वहां की खूबसूरती का आनंद उठाते थे। एकांत भवन के केयर टेकर चंदन सिंह ने बताया कि एक बार वाजपेयी ने उन्हें अपना टेलीफोन नंबर देते हुए कहा था कि भविष्य में कभी मेरी जरूरत हो तो फोन कर लेना।
देश में जब इमरजेंसी लगी तब और इमरजेंसी खत्म होने के बाद पार्टी को मजबूत करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी का समय-समय पर रुड़की आना लगा रहा। बिजली विभाग से रिटायर्ड राजकुुमार शर्मा ने बताया कि उनके बड़े भाई स्वर्गीय बृजभूषण शर्मा रुड़की मंडल के भाजपा अध्यक्ष थे। वर्ष 1982 के आसपास अटल जी उनके चंद्रपुरी स्थित पुराने घर में आए थे। बृजभूषण शर्मा उस समय बीएसएम कॉलेज में अंग्रेजी के शिक्षक थे और पक्के जनसंघी थे। हरिद्वार से लौटते समय जब अटलजी घर आए थे तो उनके यहां लोगों का भारी जमावड़ा लग गया। उनके पहुंचने पर जब जलपान के लिए कहा गया तो अटल जी ने बृजभूषण शर्मा के कान में धीरे से कहा कि ‘जल मैंने पी लिया है और पान मैं खाता नहीं हूं’।
अपने काम के प्रति अटल बिहारी वाजपेयी इस कदर समर्पित थे कि बड़े से बड़े ओहदे पर होने के बाद भी उन्होंने कभी सुविधाओं की ओर मुंह नहीं ताका। काम के समय उन्हें स्कूटर मिला तो स्कूटर से घूमे और बस या ट्रेन छूट गई तो वह ट्रक में सवार हो गए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने बताया उन दिनों हल्द्वानी से रात्रि बस सेवा नहीं थी। वाजपेयी जी पहाड़ से यात्रा कर जब हल्द्वानी पहुंचे तो दिल्ली की बस छूट चुकी थी। रात में कोई और बस नहीं थी। उन्हें हर हाल में पार्टी बैठक में शामिल होना था। वे दिल्ली जा रहे एक ट्रक में सवार हो गए।