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उत्तरकाशी: गोमुख व केदारताल क्षेत्र में बन रही छोटी झीलों से बढ़ा खतरा, नेपाल त्रासदी के बाद बढ़ी चिंता

Mon, 31 Aug 2026 10:29 AM IST
Renu Saklani विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी Published by: Renu Saklani Updated Mon, 31 Aug 2026 10:29 AM IST
सार

गोमुख व केदारताल क्षेत्र में बन रही छोटी झीलों से खतरा बढ़ गया है। इन झीलों पर बारिश से दबाव बन रहा है। लोगों ने इनके अध्ययन कराए जाने की मांग की है।

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Rising threat from small lakes forming in the Gomukh and Kedartal region Uttarkashi Rainfall, Nepal Disaster
झील - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

पांच दिन पूर्व नेपाल और तिब्बत में हुई त्रासदी के बाद अब गंगा व पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने गंगोत्री ग्लेशियर के गोमुख और केदारताल में बन रही छोटी-छोटी झीलों पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि समुद्रतल से करीब चार से पांच हजार मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश अधिक होने से अब यह झीलें कभी भी जनपद के लिए बड़ी आपदा का रूप ले सकती है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सभी सुपरा ग्लेशियर झीलें हैं।

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यह अधिकांश अस्थाई होती है इसलिए इनसे बड़ा खतरा नहीं होता है। गंगोत्री ग्लेशियर पर गोमुख वाले क्षेत्र में गंगा के उद्गम वाले स्थान के आसपास ग्लेशियर मलबे पर छोटी-छोटी झीलें बनी हुई हैं। दूसरी ओर केदारताल क्षेत्र में इसी प्रकार की झीलें हैं। इस पर पर्यावरणविद सुरेश भाई का कहना है कि गंगोत्री घाटी सहित ग्लेशियर पूर्व से ही संवेदनशील स्थान रहा है।
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झीलों का गहन अध्ययन करने की मांग की
गंगोत्री ग्लेशियर के गोमुख क्षेत्र व केदारताल के आसपास बनी यह झीलें कभी भी बड़ी आपदा का रूप ले सकती है क्योंकि चार से पांच हजार मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहले हल्की बारिश होते ही बर्फ गिरती थी। अब वहां बारिश अधिक हो रही है। इससे इन झीलों में पानी की मात्रा बढ़ रही है।
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अब गोमुख के ग्लेशियर मलबे पर बनी झीलें कभी भी बड़ी आपदा का रूप ले सकती है। इसलिए इनकी निगरानी के साथ ही अर्ली वार्निंग सिस्टम जल्द स्थापित होना चाहिए। गंगा विचार मंच के प्रांत संयोजक लोकेंद्र बिष्ट व गोमुख से लौटे ग्राम प्रहरी प्रखर बिष्ट ने प्रदेश सरकार से इन झीलों का गहन अध्ययन करने की मांग की है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनीष मेहता का कहना है कि यह सुपरा ग्लेशियर झीलें हैं। यह अधिकांश अस्थाई होती है। इसलिए इनसे अधिक खतरा नहीं है।
 

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