देश से कालाधन और भ्रष्टाचार पर चोट करने के लिए नोटबंदी का आइडिया तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली को किसने सुझाया, इसका खुलासा उन्होंने खुद किया था। 12 मार्च 2017 को हरिद्वार में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बात बताई थी।
अरुण जेटली तब हरिद्वार के औरंगाबाद में बाबा रामदेव के योग ग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बताया था कि नोटबंदी का आइडिया योग गुरु रामदेव ने सुझाया था। जेटली ने यह भी कहा था कि एक जुलाई से लागू होने जा रहा एकीकृत टैक्स और प्लास्टिक मनी का फॉर्मूला भी उन्हें बाबा ने दिया था। इस दौरान जेटली ने स्वामी रामदेव को अर्थशास्त्र का ज्ञाता बताया था।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
जेटली ने चुटकी लेते हुए कहा था कि एक समय बाबा रामदेव को अर्थशास्त्र का शौक पैदा हो गया था। पांच साल पहले जब वे विपक्ष में थे, तब बाबा रामदेव ने उन्हें टीवी पत्रकार रजत शर्मा के घर मिलने बुलाया और आर्थिक मसलों पर काफी देर तक बातचीत की थी।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
बातचीत के बाद तय हुआ कि दोनों आर्थिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से बहस करेंगे। तब दिल्ली के एक ऑडिटोरियम में करीब एक हजार चार्टर्ड एकाउंटेंट को बुलाया गया था। वित्त मंत्री ने बताया कि चार्टर्ड एकाउंटेंट बारी-बारी से सवाल करते रहे और बाबा रामदेव और वे उनके सवालों का जवाब देते रहे।
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इस कार्यक्रम के मूल में बाबा रामदेव की तरफ से तीन ऐसी बातें निकलकर सामने आई, जिन पर कभी गौर नहीं किया गया था। पहली एक हजार और पांच सौ रुपये के बड़े नोट बंद करना। दूसरी सभी तरह के टैक्स खत्म कर केवल एक टैक्स लगाना। जिससे टैक्स की चोरी न हो और किसी को टैक्स देना भारी भी न पड़े। तीसरी बात प्लास्टिक करेंसी के तौर पर सामने आई थी।