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उत्तराखंड के इस बड़े मेले में टूटी सदियों पुरानी परंपरा, नहीं हुई पशुबलि

Fri, 09 Sep 2016 03:53 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, चमोली
ब्यूरो / अमर उजाला, चमोली Updated Fri, 09 Sep 2016 03:53 PM IST
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animal Slaughter stops in nanda ashtami fair
jakh mela

चमोली में दशोली ब्लाक की ग्राम पंचायत लासी के प्रसिद्ध जाख नंदा अष्टमी मेले में इस बार किसी बेजुबां का खून नहीं बहा।

animal Slaughter stops in nanda ashtami fair
jakh mela

सदियों से चली आ रही बलि प्रथा पर रोक लगने से मेले के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना के बाद चढ़ावे का भैंसा प्रशासन को सौंप दिया।  

animal Slaughter stops in nanda ashtami fair
jakh mela

यहां जाख मंदिर में बृहस्पतिवार को आयोजित मेले में क्षेत्र के नौ गांवों के देवी-देवताओं के साथ ही ग्रामीणों ने बड़ी संख्या भाग लिया। गांवों से आये भक्तों ने जाख मंदिर में पूजा अर्चना कर कुशलता की मनौती मांगी।

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animal Slaughter stops in nanda ashtami fair
jakh mela

मेले में पुरानी परंपरा के अनुसार भैंसे की बलि दी जाती थी, लेकिन इस बार प्रशासन ने ग्रामीणों से वार्ता कर मंदिर में होने वाली पशु बलि को रोक दिया।

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jakh mela

इस मुद्दे पर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच खूब बहस हुई।

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