जी हां, ये हम नहीं कह रहे हैं। परिवहन निगम में सामने आया घोटाला इस बात की गवाही दे रहा है।
उत्तराखंड परिवहन निगम में सामने आए घोटाले की परतें खुलने लग गई हैं। विशेष श्रेणी के अंतर्गत आने वाले सीनियर सिटीजन (बुजुर्गों) के टिकट आधार कार्ड के सिर्फ अंतिम चार नंबर के आधार पर बनाए जा रहे हैं। जबकि आधार कार्ड 12 नंबर का होता है।
परिचालक स्थानीय अधिकारियों की ओर से मशीन में चार नंबर डालने के निर्देश मिलने की बात कह रहे हैं, जबकि निगम मुख्यालय के अधिकारी ऐसे टिकटों को पूरी तरह गलत बता रहे हैं। निगम की बसों में हर माह डेढ़ लाख से अधिक बुजुर्ग यात्रा करते हैं।
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कई सालों से प्रदेश के बुजुर्गों को निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा मिल रही है। 65 साल या इससे अधिक की महिला/पुरुष, आयु से संबंधित प्रमाण पत्र दिखाकर निगम की साधारण बसों में निशुल्क यात्रा कर सकते हैं। एक जनवरी 2018 से 31 मार्च 2018 तक 4,95,617 बुजुर्गों ने मुफ्त यात्रा की। इनमें 3,43,05,511 लाख रुपये खर्च आया है।
90 फीसदी बुजुर्गों ने आधार कार्ड के आधार पर यात्रा की है। इस दौरान परिचालकों ने उनके आधार कार्ड के अंतिम चार नंबर ई-टिकटिंग मशीन में ही अंकित किए। परिचालकों के मुताबिक ई-टिकटिंग मशीन में आधार कार्ड के अंतिम चार नंबर डालने के निर्देश उन्हें डिपो के अधिकारियों से मिले हैं।