रायपुर से सटे सौड़ा सरौली गांव के जंगल में बृहस्पतिवार की सुबह भीषण आग लग जाने भारी तबाही हुई। अग्निकांड की सूचना पाकर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमों के अलावा अग्निशमन, वन, स्वास्थ्य समेत आपदा प्रबंधन से जुडे़ तमाम विभागों के अधिकारी राहत टीमों के साथ मौके पर पहुंचे और घंटे भर की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
राहत अभियान के दौरान कई राहतकर्मियों और ग्रामीणों समेत 13 लोग घायल हो गए। घायलों को अलग अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जहां उनकी हालत सामान्य बतायी जा रही है। चौंकिये नहीं यह वनाग्नि नही वरन केंद्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अफसरों की मौजूदगी में आयोजित की गई राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल थी।
वन विभाग अफसरों को बृहस्पतिवार की सुबह साढ़े नौ बजे सूचना दी गई कि रायपुर से सटे सौड़ा सरोली गांव के जंगल में भीषण आग लग गई है। इसकी जानकारी तत्काल आपदा प्रबंधन केंद्र को दी गई तो आला अफसरों के निर्देश पर अग्निशमन, वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंची। लेकिन आग की भयावहता को देखते हुए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस को मौके पर बुला लिया।
इसी बीच आग ने गांव को अपनी गिरफ्त मेें ले लिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मेजर जनरल वीके दत्ता, आपदा प्रबंधन सचिव अमित नेगी, आईजी संजय गुंज्याल, डीएम रविनाथ रामन, एसएसपी स्वीटी अग्रवाल समेम तमाम आला अफसर भी मौके पर पहुंचे। आखिरकार अफसरों की मौजूदगी में चले राहत अभियान के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन कर्मियोें ने आग पर काबू पाया।
लेकिन इस दौरान कई राहतकर्मियों, ग्रामीणों समेत 13 लोग घायल हो गए। डॉक्टरों ने कई घायलों का तो मौके पर ही इलाज किया, जबकि कई गंभीर घायलों को रायपुर सीएचसी और दून अस्पताल पहुंचाया गया। केंद्रीय आपदा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल ने अफसरों ने यह जायजा लिया कि आखिरकार जंगलों में लगी आग से सरकारी मशीनरी कितनी मुस्तैदी के साथ निपटती है। दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम ने मॉक ड्रिल को कारगर बताया।